अगर आप सैलरीड क्लास हैं और हर महीने आपका पीएफ कटता है तो इस खबर के बारे में आपको पता होना जरूरी है. जी हां, केंद्र सरकार ने ऐसी कंपनियों के लिए नियमों को पूरी तरह बदल दिया गया है, जो पीएफ (PF) कॉन्ट्रीब्यूशन को प्राइवेट ट्रस्ट के जरिये खुद मैनेज करती हैं. ईपीएफओ (EPFO) के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने नियमों को लेकर एसओपी (SOP) को मंजूरी दे दी है. इसका मकसद कारोबारी सुगमता बढ़ाने के साथ ही रेग्युलेटरी सुपरविजन मजबूत करना है. नए नियमों को जल्द नोटिफाई कर दिया जाएगा. इन नियमों का सीधा असर 1000 से ज्यादा उन कंपनियों और सार्वजनिक अंडरटेकिंग पर पड़ेगा, जो ईपीएफ एक्ट के सेक्शन-17 के तहत छूट वाली कैटेगरी में आते हैं.
ब्याज दरों पर लगाम
नए बदलावों के तहत अब जिन कंपनियों को छूट मिली है वो अपनी मर्जी से ज्यादा ब्याज का ऐलान नहीं कर पाएंगी. अब पीएफ को मैनेज करने वाली ये ट्रस्ट EPFO की तरफ से घोषित की गई सालाना ब्याज दर से 2 प्रतिशत से ज्यादा ब्याज नहीं दे सकते. सरकार की तरफ से यह कदम फाइनेंशियल डिसिप्लीन को ध्यान रखते हुए उठाया गया है. पहले यह जानकारी में आया था कि कुछ छोटे ट्रस्ट 34 प्रतिशत तक का रिकॉर्ड ब्याज दे रहे थे. अब ब्याज दर की लिमिट तय होने से अनिश्चितता खत्म होगी.
रिस्क-बेस्ड ऑडिट सिस्टम
कंपनियों के लिए ऑडिट प्रोसेस को आसान बनाया गया है. पहले सभी छूट लेने वाली ट्रस्ट के लिए हर साल ऑडिट कराना जरूरी होता था. लेकिन अब इसकी जगह ‘रिस्क-बेस्ड ऑडिट’ सिस्टम को लागू किया गया है. इसका मतलब साफ है कि EPFO केवल उन संस्थानों पर फोकस करेगा, जो हाई-रिस्क कैटेगरी में हैं या नियमों का पालन नहीं कर रहे. ऐसे कंपनियां जो सभी नियमों को फॉलो कर रही हैं, उन्हें हर साल ऑडिट कराने की जरूरत नहीं होगी.
मर्जर और छूट कैंसिल होने पर नए प्रावधान
कंपनियों के मर्जर और एक्विजेशन (M&A) के हालात में अब राहत दी गई है, यहां कंपनियां अपनी ‘छूट प्राप्त स्थिति’ (Exempted Status) को बरकरार रख सकेंगी. इसके अलावा, यदि कोई कंपनी छूट को अपनी मर्जी से छोड़ती है या कोर्ट के आदेश पर इसे रद्द किया जाता है तो उसे न्यूज पेपर में पब्लिकली नोटिस देना होगा. इस हालात में सभी सदस्यों की जमा राशि और केवाईसी (KYC) अकाउंट को सही तरीके से ट्रांसफर करना जरूरी होगा, ताकि किसी भी तरह का मिसयूज रोका जा सके.








