संसद में महिला आरक्षण बिल पास नहीं होने पर विपक्ष निशाने पर है. आरएलएम (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) प्रमुख सह राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) ने कहा कि अगर यह बिल पास हो जाता, तो देश की माताओं-बहनों को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलता. उपेंद्र कुशवाहा रविवार (19 अप्रैल, 2026) को सासाराम में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे.
इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए महिला आरक्षण बिल और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण की दिशा में यह एक बड़ा कदम हो सकता था, लेकिन विपक्ष के रवैए के कारण यह संभव नहीं हो सका.
‘परिसीमन को लेकर लंबे समय से चला रहे अभियान’
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से परिसीमन को लेकर अभियान चला रहे हैं. उन्होंने बताया कि यदि परिसीमन बिल पास हो जाता, तो बिहार में लोकसभा सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 हो जाती. बिहार की विधानसभा सीटें 243 से बढ़कर 365 तक पहुंच जातीं. उनका मानना है कि परिसीमन होने से न केवल जनप्रतिनिधित्व बेहतर होगा, बल्कि राज्यों को उनकी आबादी के अनुसार उचित प्रतिनिधित्व भी मिलेगा.
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल लागू होने पर इन बढ़ी हुई सीटों में महिलाओं को अधिक अवसर मिलता. उनके अनुसार, यह कदम देश की लोकतांत्रिक संरचना को और सशक्त बनाने में सहायक साबित होता.
‘जनता ने विपक्ष के रवैए को देख लिया’
कुशवाहा ने कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर सहयोग नहीं किया. उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष के रवैए को देश की जनता ने देख लिया है. इससे साफ हो गया है कि वे महिलाओं के सशक्तीकरण के प्रति गंभीर नहीं हैं.
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) ने रविवार को घोषणा की कि वह 22 अप्रैल को पूरे बिहार में पार्टी के सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध मार्च आयोजित करेगा. कुल मिलाकर, महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे पर सियासत अभी थमने वाली नहीं है.







