मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच एक बड़ी घटना सामने आई, जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करने की कोशिश कर रहे दो भारतीय जहाजों पर हमला कर दिया. इस घटना को लेकर भारत ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की है और इसे गंभीर मामला बताया है. इसी मुद्दे पर जब एक पत्रकार ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सवाल पूछने की कोशिश की तो उनका व्यवहार काफी सख्त नजर आया. सीबीएस न्यूज की व्हाइट हाउस रिपोर्टर ओलिविया रिनाल्डी ने 18 अप्रैल को ईरान की स्थिति और होर्मुज में हुई इस घटना को लेकर सवाल पूछा. वह जानना चाहती थीं कि ईरान की ओर से भारतीय जहाजों पर किए गए हमले पर अमेरिका का क्या रुख है.
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में देखा गया कि जैसे ही पत्रकार ने सवाल पूछा, ट्रंप नाराज हो गए और उन्होंने पत्रकार को वहां से बाहर जाने के लिए कह दिया. इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने ट्रंप के इस रवैये पर सवाल उठाए और इसे गलत बताया. खुद ओलिविया रिनाल्डी ने भी इस वीडियो को दोबारा शेयर करते हुए लिखा कि उन्होंने सिर्फ जहाजों पर हुए हमले को लेकर सवाल पूछने की कोशिश की थी, लेकिन राष्ट्रपति ने उन्हें बाहर जाने को कह दिया
सवाल पूछने वाली पत्रकार कौन थी?
घटना ऐसे समय पर हुई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में कोई खास प्रगति नहीं हो रही है और हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. इसी बीच ट्रंप ने एक इमरजेंसी सिचुएशन रूम में बैठक भी बुलाई है, जिससे साफ है कि स्थिति को लेकर अमेरिकी प्रशासन गंभीर है. डोनाल्ड ट्रंप से सवाल पूछने वाली ओलिविया रिनाल्डी सीबीएस न्यूज में व्हाइट हाउस रिपोर्टर के तौर पर काम करती हैं. उन्होंने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान को भी कवर किया था. इससे पहले वह CBS Evening News with Norah O’Donnell में एसोसिएट प्रोड्यूसर रह चुकी हैं और उन्होंने 60 Minutes और CBS News Sunday Morning जैसे कार्यक्रमों के साथ भी काम किया है.
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया
इस पूरे मामले के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त बयान भी दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान ने संघर्ष विराम का गंभीर उल्लंघन किया है, लेकिन उन्हें अब भी उम्मीद है कि शांति समझौता हो सकता है. ट्रंप ने कहा कि यह समझौता किसी भी हाल में होगा, चाहे वह अच्छे तरीके से हो या फिर दबाव के जरिए. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान को एक अच्छा समझौता दे रहा है और ईरान को इसे मान लेना चाहिए. अगर ईरान ऐसा नहीं करता है तो अमेरिका कड़े कदम उठा सकता है, जिसमें पुलों और पावर प्लांट जैसे अहम ढांचों पर हमले भी शामिल हो सकते हैं.







