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‘सुरक्षा हटा दीजिए, फिर देखिए कौन डरकर बिल्ली बन जाता है’: SC की यूपी पुलिस पर टिप्पणी के बाद योगी का पलटवार

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (1 अक्टूबर) को राज्य पुलिस का बचाव करते हुए कहा कि आधिकारिक सुरक्षा के घेरे में बैठकर पुलिस की आलोचना करना आसान है। उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो सुरक्षा व्यवस्था के बीच रहकर दूसरों पर टिप्पणी करते हैं।

लखनऊ के लोक भवन में आयोजित पुलिस पदक समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षित कमरे में बैठकर दूसरों पर टिप्पणी करना आसान होता है। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति की सुरक्षा हटा दी जाए तो उसका आत्मविश्वास और व्यवहार बदल सकता है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा, “कोई कितना भी बड़ा व्यक्ति हो, उसे अपने पद पर कितना भी गर्व क्यों न हो, लेकिन अगर उसकी सुरक्षा हटा दी जाए तो उसे भीगी बिल्ली बनने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।”

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर की गई कड़ी टिप्पणी के एक दिन बाद आई। मामला एक मोटरसाइकिल सवार से जुड़ा था, जिस पर एक महिला ने उत्पीड़न का आरोप लगाया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसने आरोपी को मौके पर पकड़कर पुलिस के हवाले किया था।

हालांकि, पुलिस ने एफआईआर में आरोपी का नाम दर्ज करने के बजाय उसे “अज्ञात” बताया था। बाद में पुलिस के हलफनामे में आरोपी का नाम सामने आया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जांच एकतरफा थी और बाद में आरोपी को क्लीन चिट दे दी गई।

जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने सवाल उठाया कि जब आरोपी को मौके पर पकड़ लिया गया था, तो एफआईआर में उसे अज्ञात क्यों बताया गया।

अदालत ने पूछा, “जब व्यक्ति को मौके पर पकड़ा गया था तो आपने अज्ञात क्यों लिखा? लोग पुलिस पर भरोसा कैसे करेंगे?” पीठ ने पुलिस की कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी के निर्देशों का पालन करना एक बात है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई और मामले को ढकने की कोशिश गंभीर सवाल खड़े करती है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि बेहतर होगा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की सभी जांच सीबीआई को सौंप दी जाएं और सवाल उठाया कि फिर यूपी पुलिस को भंग ही क्यों न कर दिया जाए। अदालत ने यूपी पुलिस से यह स्पष्ट करने को कहा है कि शुरुआत में एफआईआर में आरोपी का नाम क्यों नहीं दर्ज किया गया था। संबंधित पुलिस अधिकारी को अगली सुनवाई में पेश होने का निर्देश भी दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार और यूपी पुलिस पर निशाना साधने के लिए इस्तेमाल किया।

इसके एक दिन बाद योगी आदित्यनाथ ने पुलिसकर्मियों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिक्रिया दी।

‘सुरक्षा के बिना हर व्यक्ति बेबस है’

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट या अखिलेश यादव का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि लोग बंद कमरे में बैठकर टिप्पणी कर सकते हैं, लेकिन ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि बाहर सुरक्षा का माहौल मौजूद है।

उन्होंने कहा, “बंद चैंबर में बैठकर चिंतन करना और टिप्पणी करना अलग विषय है। हम चिंतन तभी सुखद रूप से कर सकते हैं, जब बाहर सुरक्षा का माहौल हो।”

योगी ने कहा कि सुरक्षा न होने पर कोई भी व्यक्ति खुद को असहाय महसूस कर सकता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस के सूत्र “आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प” का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस लोगों की सुरक्षा के लिए काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय राज्य में माफिया का प्रभाव था और राजनीतिक नेतृत्व अपराधियों के सामने झुक गया था।

उन्होंने कहा, “अगर राजनीतिक नेतृत्व की रीढ़ ही टेढ़ी हो तो कानून-व्यवस्था को कैसे सीधा किया जा सकता है?”

योगी ने दावा किया कि उस समय सत्ता में बैठे लोग माफिया के सामने झुकते थे, जबकि अब उत्तर प्रदेश पुलिस की पहचान अलग है और पुलिसकर्मियों को अपनी पहचान छिपाने की जरूरत नहीं है।

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में वर्तमान में संचालित सात पुलिस कमिश्नरेट का भी उल्लेख किया।

87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी

पुलिस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के अलावा कई अन्य कार्यक्रम भी हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए 87 हाईटेक इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाई।

इन वाहनों का इस्तेमाल गश्त, सड़क सुरक्षा नियमों के पालन और आपात स्थिति में पुलिस की त्वरित कार्रवाई को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।

कार्यक्रम में पुलिसकर्मियों को वीरता और उत्कृष्ट सेवा के लिए पदक भी प्रदान किए गए। दस पुलिसकर्मियों को मुख्यमंत्री वीरता पदक और 16 पुलिसकर्मियों को राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का भी विमोचन किया गया। पुस्तक में पुलिस सुधार और पुलिस सेवा से जुड़े उनके अनुभवों का उल्लेख है।

योगी ने यूपी के ‘आतंकवाद’ के दौर को किया याद

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने छात्र जीवन का भी जिक्र किया और उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र की उस समय की सुरक्षा स्थिति को याद किया।

उन्होंने कहा कि जब वह कॉलेज में थे, तब तराई क्षेत्र में “आतंकवाद” की स्थिति थी और लोगों के बीच भय का माहौल था। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह जैसे अधिकारियों ने कठिन परिस्थितियों में कड़े फैसले लेकर क्षेत्र में शांति बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

योगी ने बताया कि पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने बाद में असम, नागालैंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर समेत कई ऐसे राज्यों में भी सेवाएं दीं, जहां उग्रवाद और आतंकवाद की चुनौतियां थीं। मुख्यमंत्री ने उनके अनुभव को देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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Author: admin

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