नीट पेपर लीक मामला, जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के बाद अब बिहार में भी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. राजधानी पटना आज (बुधवार, 22 जुलाई) ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के नेतृत्व में विरोध-प्रदर्शन किया गया. छात्रों की आड़ में शुरू किए गए इस प्रदर्शन को हिंसक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई. AISA के प्रदर्शन की आड़ में बुद्ध की धरती और महात्मा गांधी की कर्मभूमि पर हिंसा देखने को मिली. प्रदर्शनकारियों ने मीडियाकर्मियों पर जानलेवा कर दिया. ज़ी मीडिया समेत कई बड़े मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को जान से मारने की कोशिश की गई. हालांकि, पटना पुलिस की त्वरित कार्रवाई से पत्रकारों की जान बची.
इस घटना को लेकर ज़ी मीडिया के वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत झा ने खुद पर हुए हमले के बारे में बारे में बताते हुए कहा कि आज मीडिया को आइसा के लोगों ने निमंत्रण भेजकर बुलाया था. मीडिया के तमाम लोग जब पहुंचे, तो वहां मौजूद अराजक तत्वों ने सबसे पहले मीडिया के लोगों को निशाना बनाया. मैं कोई सवाल पूछता, भीड़ मेरे पास आई और कैमरामैन को पीट दिया, कनेक्टर तोड़ दिया गया. मुझ पर हमला किया गया.
ज़ी मीडिया के रिपोर्टर प्रिंस ने बताया कि मीडिया कर्मियों से मारपीट की गई. माइक छीन लिया गया. कपड़े फाड़े गए. वहीं, ज़ी बिहार-झारखंड के स्थानीय संपादक स्वप्निल सोनल ने बताया कि यह धरती बुद्ध की है, लेकिन यहां मीडियाकर्मियों पर इस तरह की हिंसा कभी देखने को नहीं मिली थी. इस धरती पर महात्मा गांधी का सत्याग्रह शुरू हुआ था.
स्वप्निल सोनल ने यह भी बताया कि पटना जिला प्रशासन ने मीडियाकर्मियों पर हमले को गंभीरता से लिया और लगातार एक्शन लिया गया. लाठीचार्ज की गई, आंसूगैस के गोले छोड़ गए और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया.
प्रशांत झा ने कहा कि पहले भीड़ मीडिया को अपने साथ लेकर चलती थी, लेकिन आज की भीड़ अपराधियों की भीड़ थी, अराजकतावादियों की थी. ये बचकर निकलना चाहते थे. ये तमाम गुंडे आज आइसा के बैनर तले मीडिया के लोगों पर हमला किया है. एक तरह से लोकतंत्र पर हमला किया गया है.








