आज के टाइम में जंग लड़ने का तरीका पूरी तरह बदल चुका है. अब युद्ध के मैदान में बड़े-बड़े लड़ाकू विमानों से ज्यादा छोटे, सस्ते और आत्मघाती ड्रोन्स का दबदबा बढ़ रहा है. इसी बीच भारत के डिफेन्स सेक्टर और स्टार्टअप वर्ल्ड से एक बेहद प्राउड करने वाली खबर आई है. हैदराबाद के एक स्टार्टअप अपोलियन डायनेमिक्स (Apollian Dynamics) ने भारत का सबसे तेज किलर ड्रोन तैयार कर लिया है, जिसका नाम है ‘आहुति Mk-II’ (Ahuti Mk-II). इस स्वदेशी इंटरसेप्टर ड्रोन ने 498 किमी/घंटा की तूफानी स्पीड हासिल करके ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम दर्ज करा लिया है. यह कोई नॉर्मल फोटो खींचने वाला या सामान पहुंचाने वाला ड्रोन नहीं है, बल्कि दुश्मन की मिसाइल और ड्रोन्स को हवा में ही उड़ा देने वाला एक शिकारी ड्रोन है. चलिए जानते हैं इस मेड-इन-इंडिया किलर ड्रोन की पूरी कहानी.
अपने ही पुराने रिकॉर्ड की उड़ा दीं धज्जियां
अपोलियन डायनेमिक्स के फाउंडर जयंत खत्री ने X (ट्विटर) पर शेयर किया कि ‘आहुति Mk-II’ ने अपनी ही कंपनी के पुराने मॉडल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. इससे पहले वाले मॉडल की टॉप स्पीड 325 किमी/घंटा थी. टीम ने सिर्फ 8 महीने की दिन-रात की मेहनत के बाद इसकी स्पीड को बढ़ाकर सीधे 498 किमी/घंटा कर दिया. आम तौर पर ड्रोन्स का काम वीडियोग्राफी या डिलीवरी का होता है, लेकिन ‘आहुति Mk-II’ को सिर्फ एक काम के लिए बनाया गया है- दुश्मन के आते हुए ड्रोन या मिसाइल को ट्रैक करना और हवा में ही टकराकर उसे खत्म कर देना.
ईरान के Shahed-136 जैसे खतरनाक ड्रोन्स की अब खैर नहीं
हाल ही में हुए ग्लोबल युद्धों में (जैसे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव) ईरान के Shahed-136 ड्रोन्स ने काफी तबाही मचाई थी. ये ड्रोन्स बहुत सस्ते होते हैं (लगभग 32 लाख रुपये के), लेकिन इन्हें हवा में मार गिराने के लिए अमेरिका जैसी सुपरपावर को करोड़ों रुपये की महंगी मिसाइलें दागनी पड़ी थीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने युद्ध के शुरुआती कुछ ही दिनों में इंटरसेप्टर मिसाइलों पर लाखों करोड़ रुपये उड़ा दिए थे. ‘आहुति Mk-II’ भारत को एक ऐसा ही पॉकेट-फ्रेंडली और सटीक ऑप्शन देता है, जो बहुत कम खर्चे में दुश्मन के Shahed-136 जैसे खतरनाक ड्रोन्स को सेकंडों में तबाह कर देगा.
10 बार बदला डिजाइन, 400 एम्पीयर की पावर से मिली स्पीड
498 किमी/घंटा की माइंड-ब्लोइंग स्पीड पाना कोई बच्चों का खेल नहीं था. इसके लिए कंपनी के इंजीनियरों ने ड्रोन के लुक, मोटर और इंजन पर जी-तोड़ काम किया: इस तूफानी स्पीड तक पहुंचने के लिए ड्रोन के 10 अलग-अलग मॉडल्स बनाए गए. यह ड्रोन एक बार में 400 एम्पीयर की हैवी पावर खींचता है, जिससे इसे रॉकेट जैसी रफ्तार मिलती है. इससे पहले कंपनी ने इंडियन आर्मी को 300 किमी/घंटा वाले ड्रोन्स दिए थे, जिन्हें अब और ज्यादा अपग्रेड कर दिया गया है. सिक्योरिटी रीजन्स की वजह से इस किलर ड्रोन की सही कीमत का खुलासा अभी नहीं किया गया है.
आर्मी की फायरिंग रेंज में हुआ धांसू टेस्ट
कंपनी ने इस ड्रोन की ताकत जांचने के लिए इंडियन आर्मी की मदद से बबीना (Babina) और गोपालपुर (Gopalpur) फायरिंग रेंज में कड़े टेस्ट किए, जहां यह पूरी तरह पास हुआ. कंपनी का मेन गोल यह है कि बहुत कम बजट में ऐसे खतरनाक हथियार बनाए जाएं, जिससे देश के डिफेन्स बजट पर ज्यादा बोझ न पड़े और हमारी सेना को लेटेस्ट टेक्नोलॉजी भी मिल जाए.
2032 तक क्रूज मिसाइल बनाने का बड़ा प्लान
अपोलियन डायनेमिक्स सिर्फ ड्रोन्स बनाकर रुकने वाला नहीं है. उनका विजन साल 2032 तक एक बड़ा ‘क्रूज मिसाइल प्लेटफॉर्म’ तैयार करने का है, जो हजारों किलोग्राम विस्फोटक ले जाने में सक्षम होगा. सबसे बढ़िया बात यह है कि इस मिशन में भारत के मशहूर ‘अग्नि मिसाइल प्रोग्राम’ के पूर्व डायरेक्टर प्रोफेसर एम. राम मनोहर बाबू इस स्टार्टअप का मार्गदर्शन कर रहे हैं.
नॉर्मल ड्रोन और इंटरसेप्टर ड्रोन में क्या फर्क होता है?
अगर आपके मन में सवाल है कि नॉर्मल और इंटरसेप्टर ड्रोन में क्या अंतर है, आइए समझते हैं…
नॉर्मल ड्रोन: यह फोटो-वीडियो लेने, मैपिंग करने या डिलीवरी के लिए होता है. इसे हवा में एक जगह टिके रहने और बैलेंस बनाने के लिए डिजाइन किया जाता है.
इंटरसेप्टर ड्रोन: यह एक उड़ती हुई मिसाइल की तरह काम करता है. इसका सिर्फ एक ही मकसद होता है—सामने से आते दुश्मन के ड्रोन को ढूंढना और उससे टकराकर उसे उड़ा देना. इसलिए इसमें बहुत ज्यादा स्पीड और कंट्रोल की जरूरत होती है.







