15 मई, 1962 को जन्मे डीके शिवकुमार कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री होंगे. उनका पूरा नाम डोड्डालाहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार है. कर्नाटक में कांग्रेस को नई उंचाइयों पर ले जाने वाले और 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के शिल्पकार शिवकुमार अब 64 साल की उम्र में चीफ मिनिस्टर पद की कमान संभालने जा रहे हैं. पिछले विधानसभा चुनावों के नतीजे 10 मई को आए थे, तभी से CM पद को लेकर सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच अंदरखाने चल रहे युद्ध का आज 28 मई को सीजफायर नहीं बल्कि पूर्ण अंत हो गया. ऐसे में आइए आपको बताते हैं, भावी सीएम डीके शिवकुमार की बायोग्राफी यानी पारिवारिक और सियासी कुंडली.
डीके शिवकुमार का जन्म रसूखदार सियासी परिवार में हुआ था. उनके पिता भी कांग्रेस में थे. करीब 45 साल का सियासी अनुभव रखने वाले DK, यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता से विधायक बने और अब लंबे इंतजार के बाद राज्य के मुखिया की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं. DK हमेशा से कांग्रेस के संकटमोचक और फंड मैनेजर बनकर राज्य में कांग्रेस की डूबती नाव को कई बार गहरे संकट से उबार चुके हैं.
23 की उम्र में हिला दी थी ‘अंगद के पैर’ जैसी मजबूत जेडीएस की नींव
DK ने सियासी दांव-पेंच लड़कपन में सीख लिए थे. यूथ कांग्रेस से सियासत में एंट्री लेने वाले DK,1980 में पॉलिटिक्स में उतरते ही जेडीएस के दिग्गजों को ललकारने लगे थे. DK ने पहला विधानसभा चुनाव 1985 में सथानूर सीट से दिग्गज नेता एचडी देवगौड़ा के खिलाफ लड़ा, करीब 15,000 वोटों से हारने के बावजूद अपने प्रदर्शन से DK ने जेडीएस की नींव हिला दी थी.
वर्तमान कनकपुरा सीट की बात करें तो ये भी जेडीएस का गढ़ थी. डीके 2008 में कनकपुरा विधानसभा सीट से विधायक बने और तब से लगातार 8 बार से यहां के विधायक हैं. उनके फैंस उन्हें ‘कनकपुरा बंडे’ यानी कनकपुरा की चट्टान मानते हैं.
सियासी कुंडली
1989 में हुए अगले विधानसभा चुनाव में डीके शिवकुमार पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर उसी सथानूर से विधायक निर्वाचित हुए.
1990–1992 के कार्यकाल में डीके कारागार और होमगार्ड मंत्री बनें.
1999–2004 के कार्यकाल में डीके शहरी विकास मंत्री बनें.
2014–2018 के कार्यकाल में डीके ऊर्जा मंत्री बनें.
2018–2019 के कार्यकाल में डीके प्रमुख सिंचाई एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री बनें
2023 की जीत के शिल्पकार
2020 से अभी तक डीके शिवकुमार कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी यानी केपीसीसी के अध्यक्ष हैं. डीके ने कर्नाटक में कांग्रेस संगठन को मजबूती देने में कोई कसर नहीं छोड़ी. 2023 में कांग्रेस की निर्णायक चुनावी जीत के प्रमुख रणनीतिकार रहे. कांग्रेस की ‘पांच गारंटी’ योजनाओं को लागू करते हुए बुनियादी ढांचे के विस्तार, शहरी आधुनिकीकरण और दीर्घकालिक विकास के जरिए डीके कर्नाटक की सेवा कर रहे हैं.
2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत के बाद शिवकुमार, सिद्धारमैया की सरकार में डिप्टी सीएम बनाए गए थे, आज करीब तीन साल बाद उनके नाम से डिप्टी हटने जा रहा है और वो फुल फ्लेज्ड पूर्ण मुख्यमंत्री होंगे.
पढ़ाई-लिखाई और पारिवारिक जीवन
डीके शिवकुमार के पास कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स की डिग्री है. कर्नाटक की सियासत में प्रभावी वोक्कालिगा समुदाय से आने वाले शिवकुमार के छोटे भाई डीके सुरेश भी पॉलिटिक्स में हैं. डीके शिवकुमार की पत्नी ऊषा शिवशंकर है. उनकी दो बेटियां हैं और एक बेटा है. बेटे का नाम आकाश है.
डीके शिवकुमार आस्था और ज्योतिष में गहरा विश्वास रखते हैं. धार्मिक प्रवत्ति वाले होने की वजह से वो बड़े-बड़े धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं. ज्योतिष और अंकशास्त्र पर विश्वास करने के साथ शिवकुमार अपने गले में लॉकेट और हाथों में धागे बांधते हैं.
पीढ़ियों से है मां लक्ष्मी की कृपा
शिवकुमार ग्रेनाइट निर्यात, रियल एस्टेट, शिक्षा और केबल टेलीविजन जैसे कारोबार संभालते हैं. ये उनके और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा संचालित कंपनियों के नेटवर्क में शामिल हैं. डीके शिवकुमार ने राज्य में एक ठोस आधार बनाया है. वो कांग्रेस पार्टी में सबसे ज्यादा वफादार हैं. हालांकि 2023 के विधानसभा चुनावों में ये कहा गया कि कांग्रेस के करीब 90 विधायक डीके के वफादार हैं. डीके करीब 840 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं. कांग्रेस जानती है कि डीके दूसरे राज्यों में चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनावों में भी फंड जुटाने की ताकत रखते हैं. उनकी नाराजगी से कांग्रेस को दूरगामी नुकसान हो सकता था, इसलिए डीके शिवकुमार की ताजपोशी के लिए कांग्रेस आलाकमान ने आखिरकार कद्दावर नेता सिद्धारमैया से इस्तीफा लिखवा लिया.









