उत्तर प्रदेश में साल 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी बहुजन समाज पार्टी ने अपना चुनावी अभियान तेज कर दिया है. पार्टी सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने चुनावी रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है और राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को चुनावी अभियान में अहम जिम्मेदारी सौंपी है.
10 अगस्त को आकाश आनंद हाथरस जिले की सादाबाद विधानसभा सीट से चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे, जहां वे पार्टी प्रभारी के नाम का ऐलान करेंगे और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे. इसके बाद 25 अगस्त को जेवर में भी उनकी बड़ी सभा प्रस्तावित है.
इसी बीच शुक्रवार, 31 जुलाई को 6 बिंदुओं में मायावती ने एक विस्तृत बयान जारी कर आकाश आनंद की भूमिका को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं और अटकलों पर सीधे जवाब दिया. उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल फिर उठने लगा है कि क्या मायावती अपने भतीजे आकाश आनंद को लेकर असहज हैं, या फिर यह बयान उन्हें राजनीतिक हमलों से बचाने के लिए एक तरह का ‘सियासी सुरक्षा कवच’ देने की कोशिश है.
उम्मीदवारों के चयन पर सिर्फ मेरा अधिकार- मायावती
मायावती ने अपने बयान में साफ कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन पूरी तरह उनके नेतृत्व में हो रहा है. उन्होंने बताया कि लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में प्रदेश और मंडल स्तर के पदाधिकारियों की कई बैठकें वे स्वयं ले चुकी हैं और अब तक करीब दो दर्जन से अधिक उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेकर उन्हें अंतिम रूप भी दे चुकी हैं. आगे भी सभी 403 सीटों पर उम्मीदवारों का फैसला वही करेंगी.
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि उम्मीदवार तय करने में आकाश आनंद की कोई भूमिका है, जबकि इसमें ‘रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है.’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में जहां भी विधानसभा या लोकसभा चुनाव होते हैं, वहां उम्मीदवारों को अंतिम रूप वही देती हैं.
मायावती ने कहा कि जिन सीटों पर उम्मीदवार तय हो चुके हैं, वहां उनकी अनुमति से वरिष्ठ पदाधिकारी जनसभाएं कर उम्मीदवारों का ऐलान कर रहे हैं. इसी क्रम में कुछ स्थानों पर आकाश आनंद भी जनसभाएं करेंगे और पहले से तय उम्मीदवारों के नाम घोषित करेंगे.
उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि आकाश आनंद उम्मीदवार तय कर रहे हैं या पार्टी में उनका कद बढ़ाया या घटाया जा रहा है. यह पार्टी की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है.
‘कद बढ़ाने या घटाने से कोई लेना-देना नहीं’
मायावती ने कहा कि आकाश आनंद पिछले करीब एक वर्ष से पूरे देश में संगठनात्मक समीक्षा बैठकों और जनसभाओं में उनकी ओर से भेजे जा रहे हैं और वे पूरी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.
उन्होंने याद दिलाया कि 9 अक्टूबर 2025 को लखनऊ में कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित महारैली में भी आकाश आनंद को भाषण देने का अवसर दिया गया था. लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए भेजा गया था.
उन्होंने कहा कि यह सब पार्टी की नियमित प्रक्रिया है और इसका आकाश आनंद के राजनीतिक कद से कोई संबंध नहीं है. साथ ही कार्यकर्ताओं से सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे ‘शरारती और जातिवादी तत्वों’ के प्रचार से सावधान रहने की अपील भी की.
क्यों उठ रहे हैं सवाल?
मायावती का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब बसपा ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए आकाश आनंद को फिर से सक्रिय भूमिका में उतारा है. एक ओर आकाश लगातार जनसभाएं करेंगे, वहीं दूसरी ओर मायावती सार्वजनिक रूप से यह दोहरा रही हैं कि उम्मीदवार तय करने का अधिकार केवल उनके पास है.
यही वजह है कि उनके बयान को लेकर दो तरह की राजनीतिक व्याख्याएं सामने आ रही हैं. एक पक्ष इसे संगठन में अंतिम अधिकार अपने पास बनाए रखने का संदेश मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे आकाश आनंद को लेकर फैल रही अटकलों पर विराम लगाने और उन्हें विपक्ष तथा सोशल मीडिया के निशाने से बचाने की कोशिश के रूप में देख रहा है.
आकाश आनंद को लेकर पहले भी बदलते रहे हैं फैसले
आकाश आनंद को लेकर मायावती का रुख पहले भी कई बार चर्चा का विषय बन चुका है.
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान शुरुआत में आकाश आनंद को बसपा के स्टार प्रचारकों में शामिल किया गया था और उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई चुनावी सभाएं भी की थीं. लेकिन चुनाव के बीच सीतापुर की एक जनसभा के बाद मायावती ने अचानक घोषणा कर दी कि आकाश अब आगे चुनाव प्रचार नहीं करेंगे. उन्होंने कहा था कि पार्टी और आंदोलन के व्यापक हित में यह फैसला लिया गया है तथा आकाश को अभी और राजनीतिक परिपक्वता हासिल करनी होगी. इसके साथ ही उन्हें पार्टी के महत्वपूर्ण पदों से भी हटा दिया गया और उनकी सभी प्रस्तावित चुनावी सभाएं रद्द कर दी गईं.
हालांकि, 47 दिन बाद ही 24 जून 2024 को मायावती ने अपना फैसला बदलते हुए आकाश आनंद को दोबारा राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाया और उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी घोषित कर दिया.
इसके कुछ महीनों बाद मायावती ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया. उस समय उन्होंने कहा था कि ‘आकाश अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में लगातार रहने के कारण उन्हें नेशनल कॉर्डिनेटर समेत सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाता है.’
यह फैसला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि इससे पहले मायावती उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित कर चुकी थीं.
आनंद की माफी फिर वापसी…
हालांकि, अप्रैल 2025 में आकाश आनंद ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी, जिसके बाद उनकी पार्टी में वापसी हुई. बाद में उन्हें राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया और संगठनात्मक बैठकों, समीक्षा कार्यक्रमों तथा चुनावी जनसभाओं की जिम्मेदारी भी सौंपी गई.
अब 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आकाश आनंद एक बार फिर बसपा के प्रमुख प्रचार चेहरों में शामिल हैं. हालांकि मायावती ने अपने ताजा बयान के जरिए साफ कर दिया है कि प्रचार अभियान की जिम्मेदारी और उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया दो अलग-अलग विषय हैं तथा अंतिम निर्णय लेने का अधिकार अभी भी पूरी तरह उनके पास ही रहेगा.
2027 की रणनीति में क्या संकेत?
बसपा की मौजूदा रणनीति दो समानांतर संदेश देती दिखाई देती है. एक ओर आकाश आनंद को मैदान में उतारकर पार्टी युवा कार्यकर्ताओं और नए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. दूसरी ओर मायावती लगातार यह संदेश भी दे रही हैं कि संगठन और टिकट वितरण पर अंतिम नियंत्रण उनके हाथ में ही रहेगा.
राजनीतिक विश्लेषक योगेश मिश्रा कहते हैं कि मायावती की सबसे बड़ी चुनौती उत्तराधिकारी तय करने की है. उनके मुताबिक, ‘उन्हें अपना ताज भी देना है, लेकिन ऐसे व्यक्ति को देना है जिसके पास अभी राजनीतिक अनुभव और वैचारिक अध्ययन सीमित है. जब भी वह बागडोर सौंपने की कोशिश करती हैं, फिर दोबारा सोचने लगती हैं.’
बैकफुट और फ्रंटफुट दोनों ओर खेल रहीं मायावती
आकाश आनंद के लिए मायावती के बयान को ‘सुरक्षा कवच’ बताए जाने के सवाल पर मिश्रा कहते हैं, ‘जब आप किसी नए चेहरे को आगे बढ़ाते हैं तो उसके लिए राजनीतिक कवच भी बनाना पड़ता है. उसके प्रति आने वाली प्रतिक्रियाओं को भी देखना होता है और जरूरत पड़ने पर सुधार भी करना पड़ता है. मायावती को उत्तराधिकारी चाहिए और इसकी सबसे अधिक संभावना आकाश आनंद की ही है. इसलिए उन्हें आकाश को लेकर कभी फ्रंटफुट तो कभी बैकफुट पर खेलना पड़ रहा है.’
हालांकि मिश्रा का मानना है कि जब तक मायावती स्वयं शीर्ष नेतृत्व में हैं, तब तक आकाश आनंद की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान पूरी तरह विकसित नहीं हो पाएगी.
वहीं वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला का कहना है कि बसपा में हमेशा से अंतिम और निर्विवाद अधिकार मायावती के पास ही रहा है. उनके अनुसार, ‘चाहे पूर्ण बहुमत की सरकार रही हो या पार्टी हाशिए पर पहुंची हो, बसपा में नंबर-1 सिर्फ मायावती रही हैं. सतीश मिश्रा और नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे नेता प्रभावशाली जरूर रहे, लेकिन पार्टी में कभी नंबर-2 की स्थिति नहीं बनी.’
शुक्ला के मुताबिक, हालिया बयान के जरिए मायावती ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आकाश आनंद की सीमाएं क्या हैं और पार्टी में अंतिम फैसला वही लेंगी.
आकाश के ससुराल की वजह से असहज मायावती?
आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य पर शुक्ला का कहना है कि मायावती उनके प्रति एक साथ असहज भी हैं और संरक्षक की भूमिका में भी हैं. उनके मुताबिक, ‘उन्हें आशंका रहती है कि यदि पूरी जिम्मेदारी आकाश आनंद को दे दी गई तो उनके आसपास के लोग पार्टी में समानांतर शक्ति केंद्र बन सकते हैं. टिकट के लिए नेताओं का रुख भी वहीं होगा, जिसे मायावती कभी स्वीकार नहीं करेंगी.’
उनका कहना है कि अभी कोई ऐसा कानूनी या राजनीतिक संकट नहीं था, जिसके कारण सफाई देना जरूरी हो. ऐसे में मायावती का ताजा बयान दरअसल यह संदेश भी है कि आकाश आनंद संगठन में अपनी तय भूमिका के भीतर ही काम करेंगे.
ऐसे में मायावती का यह बयान केवल आकाश आनंद की भूमिका स्पष्ट करने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के भीतर नेतृत्व, अधिकार और राजनीतिक संदेश के बीच संतुलन साधने की एक महत्वपूर्ण कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है.








