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ईरान युद्ध में अमेरिका की सबसे बड़ी तबाही! 42 जेट बर्बाद, 2.4 लाख करोड़ रुपए स्वाहा

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ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ युद्ध अब दो महीने से ज्यादा समय पार कर चुका है, लेकिन इसके खत्म होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं. इस जंग में जहां अमेरिका ईरान पर दबाव बनाकर सत्ता परिवर्तन का सपना देख रहा था, वहीं ईरान अब तक झुकने को तैयार नहीं हुआ है. अब इस युद्ध को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि अमेरिका को इस लड़ाई में भारी सैन्य और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है.

अमेरिकी रिसर्च रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

अमेरिकी संसद की आधिकारिक रिसर्च विंग ‘कांग्रेशनल रिसर्च सर्विस’ यानी सीआरएस की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खिलाफ चलाए गए सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में अमेरिकी सेना को भारी नुकसान हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार युद्ध में अमेरिका के कम से कम 42 लड़ाकू विमान, रीपर ड्रोन और अन्य सैन्य विमान या तो पूरी तरह नष्ट हो गए हैं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं.

अमेरिकी सैन्य इतिहास का बड़ा नुकसान

रिपोर्ट में कहा गया है कि वियतनाम और इराक युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिका को किसी युद्ध में अपने इतने आधुनिक और महंगे विमानों का नुकसान उठाना पड़ा है. सीआरएस ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय, सेंट्रल कमान और खुफिया रिपोर्ट्स के आधार पर यह आंकड़े तैयार किए हैं.

ईरान ने मार गिराए 24 रीपर ड्रोन

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका का सबसे खतरनाक और आधुनिक माना जाने वाला ‘रीपर ड्रोन’ इस युद्ध में ईरान का आसान निशाना बना. दावा किया गया है कि ईरान ने युद्ध के दौरान अमेरिका के 24 रीपर ड्रोन मार गिराए हैं.

एफ-15ई और स्टील्थ फाइटर जेट भी हुए तबाह

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के सबसे एडवांस पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट को भी इस युद्ध में नुकसान पहुंचा है. इसके अलावा अमेरिका के 4 एफ-15ई स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट भी क्षतिग्रस्त हुए हैं.

रिफ्यूलर विमान और हाई-टेक ड्रोन भी निशाने पर

ईरान ने हवा में लड़ाकू विमानों को ईंधन पहुंचाने वाले 7 बड़े रिफ्यूलर विमानों को भी निशाना बनाया. इसके अलावा 1 ग्राउंड-अटैक विमान, 1 ई-3 सेंट्री अवाक्स, 2 स्पेशल ऑपरेशंस विमान, 1 रेस्क्यू हेलीकॉप्टर और 1 हाई-टेक जासूसी ड्रोन एमक्यू-4सी ट्राइटन भी नुकसान की सूची में शामिल हैं.

2.4 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा युद्ध खर्च

इस युद्ध का सीधा असर अमेरिकी खजाने पर भी पड़ा है. 12 मई को अमेरिकी संसद की ‘हाउस एप्रोप्रिएशंस सबकमेटी’ की सुनवाई के दौरान पेंटागन के एक्टिंग कंट्रोलर जूल्स डब्ल्यू हर्स्ट तृतीय ने बताया कि ईरान में चल रहे सैन्य अभियानों का अनुमानित खर्च बढ़कर 29 अरब डॉलर यानी करीब 2.4 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि यह भारी खर्च तबाह हुए सैन्य उपकरणों, फाइटर जेट्स और ड्रोन की मरम्मत और नए उपकरण खरीदने में लग रहा है.

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