ईरान-अमेरिका युद्ध ने बाद से भारत में सिलेंडर के दाम से लेकर नियमों में कई बड़े बदलाव हुए हैं. घरेलू सिलेंडर की कीमत युद्ध शुरू होने के बाद से 89 रुपये और 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत दोगुनी से भी अधिक हो चुकी है. सरकार ने तेल कंपनियों को हो रहे घाटे को कम करने के लिए दाम बढ़ा दिए, अब सरकारी खजाने पर दबाव को कम करने के लिए एलपीजी सिलेंडर की सब्सिडी में बड़ा बदलाव किया है. सरकार ने प्रधानमंत्री उज्जवला योजना स्कीम के तहत सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या को 9 से घटाकर 4 कर दिया है . यानी अब इस स्कीम के तहत सिर्फ 4 सिलेंडरों पर ही लाभार्थियों को 300 रुपये की सब्सिडी मिलेगी.
सरकार ने ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत बड़ा बदलाव किया है. सरकार अब इस योजना के तहत दी जाने वाली सब्सिडी की संख्या को घटा दिया है. पहले 9 सिलेंडरों पर सब्सिडी मिलती थी. 942 रुपये वाले वाले सिलेंडर पर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनेफिट्स मिलता था, जिसे अब घटाकर सिर्फ 4 कर दिया गया है. मतलब कि अब सिर्फ 4 सिलेंडरों पर ही ये सब्सिडी मिलेगी. बाकी के 5 सिलेंडरों के लिए पूरी कीमत चुकानी होगी.
9 से घटाकर 4 सिलेंडर करने पर कितना बचा लेगी सरकार?
सरकार उज्जवला स्कीम पर भारी भरकम खर्च करती है. वित्त वर्ष 2025-26 में इस स्कीम पर 12000 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. सरकार इस खर्च में कटौती करना चाहती है, ताकि सरकारी खजाने पर बोझ को कम किया जा सके. अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमतों में बढ़ोतरी हुई के चलते एक सिलेंडर की सप्लाई लागत 1600 रुपये से ज्यादा पहुंच चुकी है, जबकि इस योजना के लाभार्थियों को सिर्फ 642 रुपये का सिलेंडर मिलता है. साल 2022 से इस योजना की सब्सिडी पर 52000 करोड़ रुपये का खर्च कर चुकी है.
सब्सिडी में कटौती से कितनी होगी सेविंग
भारत में PMUY 2.0 योजना के तहत 10.58 करोड़ एलपीजी कनेक्शन इस उज्जवला स्कीम से जुड़े हैं. हर परिवार को साल में 9 सिलेंडर पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी मिलती है, यानी साल में करीब 2700 रुपये सब्सिडी के तौर पर बैंक खाते में वापस आ जाते हैं. अब सरकार ने इन सब्सिडी वाले सिलेंडर की संख्या घटाकर 4 कर दी है, यानी अब खाते में 2700 रुपये की जगह सिर्फ 1200 रुपये ही आएंगे. यानी पहले सरकार उज्जवला योजना के तहत सिलेंडरों की सब्सिडी पर 2700*10.58 करोड़ यानी करीब 28566 करोड़ रुपये खर्च करती थी. अब ये खर्च 1200*10.58 करोड़ यानी 12,696 करोड़ रुपये हो जाएगा. यानी हर साल सरकार करीब 15,870 करोड़ रुपये की सेविंग कर लेगी .
LPG सिलेंडर की असली कीमत कितनी, कितना लगता है टैक्स ?
एक 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत का ब्रेकअप देखें तो टैक्स और डिस्ट्रीब्यूशन के पहले इसकी कीमत 823.73 रुपये होती है. इसपर 73.08 रुपये डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन लगता है. 5 फीसदी जीएसटी के हिसाब से करीब 45.19 रुपये टैक्स लगता है, इस तरह एक सिलेंडर का रेट 942 रुपये पर पहुंच जाता है. वित्त वर्ष 2025-26 में एलपीजी सिलेंडर पर सिर्फ GST से सरकार ने 4000 करोड़ रुपये की कमाई की. ऐसे में मन में सवाल जरूर उठता है कि जब चुनाव के दौरान पार्टियां फ्री सिलेंडर देने का वादा करती है और देती भी हैं, तो संकट के दौरान इस टैक्स में कटौती क्यों नहीं कर देती है. अगर देखा जाए तो एक सिलेंडर पर करीब 118.27 रुपये सिर्फ कमीशन और टैक्स के तौर पर वसूला जाता है. सरकार इसमें कटौती कर आम लोगों को राहत क्यों नहीं दे सकती है ? हालांकि यहां ये भी समझना जरूरी है कि टैक्स के पैसों से ही देश चलता है. ऐसे में सरकार सारे गुणा-गणित करने के बाद ही फैसला लेती है. महंगाई बढ़ाकर सरकार आम लोगों को झटका देकर उनकी नाराजगी नहीं झेलना चाहती है.








