ईरान और अमेरिका- इजरायल के बीच युद्ध अब लगभग 3 सप्ताह से जारी है, लेकिन इसका कोई अंत अभी नजर नहीं आ रहा है. इस बीच दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावी रूप से बंद है, जिससे भारत सहित पूरी दुनिया में ईंधन की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी इस संकट को लेकर आगाह किया है.
IEA ने जताई चिंता
IEA के प्रमुख फातिह बिरोल ने सोमवार को कहा कि इस युद्ध से पैदा हुए ऊर्जा संकट से वैश्विक अर्थव्यवस्था बहुत बड़े खतरे में है और कोई भी देश इसके प्रभावों से अछूता नहीं रहेगा. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की राजधानी में नेशनल प्रेस क्लब में कहा, ‘मौजूदा हालात अब पूर्व में दो बार आए तेल संकटों का मिला-जुला रूप बन गया है. आज वैश्विक अर्थव्यवस्था बहुत बड़े खतरे का सामना कर रही है. मुझे उम्मीद है कि इस मुद्दे का समाधान जल्द ही होगा. अगर यह संकट इसी दिशा में बढ़ता रहा, तो कोई भी देश इसके प्रभाव से बच नहीं पाएगा. इसलिए अब वैश्विक स्तर पर तुरंत प्रयासों की जरूरत है.’
स्टॉक खोलने पर सहमति
IEA ने पहले भी तेल संकट को लेकर चेतावनी दी थी. बीते शुक्रवार को एजेंसी ने सुझाव दिए थे, जिनसे सरकारें, कंपनियां और आम लोग इस संकट के प्रभाव को कम कर सकते हैं. 11 मार्च को IEA के सदस्य देशों ने आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमति दी, जो एजेंसी के इतिहास में स्टॉक से की गई सबसे बड़ी निकासी है.
होर्मुज से जहाजों की आवाजाही ठप
इस युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार में सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा पैदा कर दी है. होर्मुज जलसंधि से जहाजों की आवाजाही बंद हो गई है, जिससे प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल कच्चा तेल और तेल उत्पाद प्रभावित हुए हैं. आवाजाही बंद होने से पेट्रोलियम बाजार पर दबाव बढ़ गया है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं. इसके अलावा डीजल, जेट ईंधन और एलपीजी जैसी रिफाइंड उत्पादों की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है.
ट्रंप की धमकी और ईरान की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर अगले 48 घंटों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरानी बिजली संयंत्रों को पूरी तरह नष्ट कर देगा. उन्होंने कहा कि हमला ईरान के सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरू होगा. इसके तुरंत बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पलटवार किया. ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला करता है, तो वह न केवल होर्मुज जलसंधि को स्थायी रूप से बंद कर देगा, बल्कि उन सभी देशों के ऊर्जा केंद्रों को भी निशाना बनाएगा जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं.









