दिल्ली की अब रद्द हो चुकी आबकारी नीति से जुड़े धन शोधन के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (30 मार्च) को दिल्ली सरकार में मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता कैलाश गहलोत से करीब पांच घंटे तक पूछताछ की. 49 वर्षीय कैलाश गहलोत दिल्ली के नजफगढ़ से ‘आप’ के विधायक हैं और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार में परिवहन, गृह और कानून मंत्री हैं.
सूत्रों के मुताबिक, कैलाश गहलोत को मामले में पूछताछ के लिए और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था. वह 2021-22 के लिए नई शराब नीति की तैयारी और कार्यान्वयन के लिए पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन के साथ मंत्रियों के समूह का हिस्सा थे.
सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने कैलाश गहलोत से नीति के ड्राफ्ट को तैयार करने में उनकी कथित भूमिका को लेकर पूछताछ की. कैलाश गहलोत ने कहा, ”GoM की बैठक में जो नीतियां बनी वही दिया गया, पॉलिसी ड्राफ्ट को लेकर भी सवाल पूछे गए. करीब साढ़े पांच घंटे पूछताछ हुई.”
एजेंसी ने अपने आरोप पत्र में कैलाश गहलोत के नाम का जिक्र किया है और मामले में पहले गिरफ्तार किए गए ‘आप’ संचार प्रभारी विजय नायर को लेकर कहा है कि नायर गहलोत को आवंटित सरकारी बंगले में रहते थे. कैलाश गहलोत दक्षिण पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ में रहते हैं. किसी लोक सेवक की ओर से किसी अन्य को सरकारी आवास का उपयोग करने की अनुमति दिए जाने को आपराधिक विश्वासघात बताते हुए ईडी ने सीबीआई से इस मामले में कार्रवाई करने को कहा था.
कैलाश गहलोत कहा, ”विजय नायर के बारे में पूछा गया. कभी मैं उस घर में शिफ्ट नहीं हुआ.” उन्होंने कहा, ”विजय नायर वहां रह रहे थे, इसकी जानकारी मुझे नहीं है, यही बात हमने कही.” उन्होंने कहा, ”निजी कारणों की वजह से मेरा परिवार शिफ्ट नहीं हुआ था.”
कैलाश गहलोत ने कहा, ”ईडी अगर बुलाएगी तो मैं आगे भी आऊंगा.” उन्होंने कहा, ”मुझे आतिशी के गोवा चुनाव प्रभारी होने के बारे में कोई जानकारी नहीं है.” उन्होंने कहा, ”गोवा के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं हैं, मेरे संज्ञान में कुछ नहीं है तो मेरे लिए कहना मुश्किल हैं.”
उन्होंने कहा, ”ईडी ने क्या सवाल किए, यह मैं नहीं बता सकता.” उन्होंने कहा, ”ईडी ने जो भी सवाल पूछे, मैंने सभी का जवाब दिया. मैंने पूरा सहयोग किया.” आप नेता ने बताया, ”यह दूसरा समन था, एक महीना पहले पहला समन आया था लेकिन मैं उपस्थित नहीं हुआ था क्योंकि बजट सेशन चल रहा था.” अरविंद केजरीवाल 9 समन के बाद भी पेश नहीं हुए, इस बारे में पूछे जाने पर कैलाश गहलोत ने कहा, ”इस पर मैं कुछ नहीं कहूंगा.” उन्होंने कहा, ”कोई घोटाला नहीं हुआ. जैसे जैसे जांच आगे बढ़ेगी यह स्पष्ट हो जाएगा.”
ईडी ने आरोप लगाया है कि आबकारी नीति के तहत ‘साउथ ग्रुप’ ने शराब कारोबार के लाइसेंस के एवज में आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं को 100 करोड़ रुपये की रिश्वत दी. ‘साउथ ग्रुप’ में भारत राष्ट्र समिति (BRS) की नेता के कविता शामिल थीं. ईडी ने अपने आरोपपत्र में यह भी आरोप लगाया है कि कैलाश गहलोत के पास एक ही सिम नंबर था लेकिन उनकी आईएमईआई (अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान) तीन बार बदली गई.
यह मामला 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की आबकारी नीति को तैयार करने और क्रियान्वित करने में कथित भ्रष्टाचार और धन शोधन से जुड़ा है. दिल्ली सरकार की विवादित आबकारी नीति को बाद में रद्द कर दिया गया था. दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने शराब नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी.
इसके बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया. इस मामले में ‘आप’ नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को ईडी ने पहले गिरफ्तार किया था और वे न्यायिक हिरासत में हैं. मुख्यमंत्री केजरीवाल को ईडी ने धनशोधन मामले में 21 मार्च को गिरफ्तार किया था और गुरुवार (28 मार्च) को एक अदालत ने ईडी की उनकी हिरासत एक अप्रैल तक बढ़ा दी थी.








