फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें इस बात का खुलासा हुआ है भारतीय जांच एजेंसियों ने अवैध पैसे को सफेद करने के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया था. भारतीय एजेंसियों ने बाताय कि कैसे आपराधिक नेटवर्क काले धन को सीमा पार ले जाने के लिए फर्जी कंपनियों, जाली व्यापारिक दस्तावेजों और अनौपचारिक चैनलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं. बता दें कि पेरिस स्थित इस वैश्विक निगरानी संस्था की ओर से इस रिपोर्ट को हाल में ही प्रकाशित किया गया था.
दरअसल, इस रिपोर्ट में बताया गया कि भूमिगत बैंकिंग, हवाला के साथ इसी प्रकार की गैर-पंजीकृत सेवाएं अब पेशेवर मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों के लिए खास हथियार के जैसे बन चुकी है. हैरान करने वाली बात है कि FATF को रिपोर्ट करने वाले करीब 80 फीसदी देशों ने मनी- लॉन्ड्रिंग के अपने मुख्य तरीकों में इन्हीं प्रणालियों का ही जिक्र किया है. कुछ तो ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिसमें केवल कुछ ही महीनों में 500 मिलियन यूरो यानी करीब 50 करोड़ रुपये के इन माध्यमों से इधर से उधर किया गया है.
FATF की रिपोर्ट में भारत के दो मामलों का जिक्र
FATF की ओर से जारी की गई इस रिपोर्ट की केस स्टडी में भारत के दो मामलों का जिक्र भी किया गया है. इसमें पहला मामला फर्जी व्यापार और शेल कंपनियों से जुड़ा है और दूसरा अवैध ऑनलाइन जुआ से संबंधित है.
केस स्टडी-1:
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2022 में भारतीय अधिकारियों ने एक ऐसी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया था, जो पूरी तरीके से शेल कंपनियों पर आधारित था. जांच में पाया गया था कि इन कंपनियों का कोई वास्तविक व्यावसाय नहीं था, बल्कि केवल नाममात्र का था. जांच में पाया गया कि ये फर्में अक्सर डमी लोगों या फिर चोरी किए गए दस्तावेजों का उपयोग करके बनाई गई थीं.
बताया गया कि इन व्यापारियों की ओर से असली सामान का आयात किया गया, लेकिन कस्टम में उनकी कीमत काफी कम बताई गई और विदेश में भुगतान की बड़ी राशि बकाया रह गई. अधिकारियों ने जांच में पाया कि घरेलू शेल कंपनियों ने जाली आयात कागजातों का उपयोग करके भारत से उस अतिरिक्त पैसे को बाहर भेजा. ये पैसे ठीक वैसे ही ट्रांसफर किए गए, जैसे असली तरीके से पैसों को भेजा जाता है.
अधिकारियों ने जांच में पाया कि इसी नेटवर्क ने सर्कुलर ट्रेड यानी गोलमाल व्यापार का इस्तेमाल भी किया था. अगर सामान्य शब्दों में समझें, तो भेजे जा रहे सामान को किसी तीसरे देश में संबंधित फर्म को भेजा जाता था, इसके बाद किसी व्यावसायिक विवाद का बहाना देते हुए भुगतान को रोक दिया जाता था. फिर उसी सामान को किसी अन्य कंपनी को भेजा जाता था, जो इसी ग्रुप से संबंधित हो. इसके बाद उस सामान की असली कीमत और असली ठिकाने को पूरी तरीके से छिपा लिया जाता था.
केस स्टडी-2
इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अवैध धन हस्तांतरण का दूसरा मामला अवैध ऑनलाइन जुआ साइट से जुड़ा था. इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ताश समेत अन्य गेम दांव पर लगे थे. जांच में अधिकारियों ने पाया कि इन प्लेटफॉर्म ने पैसे जमा करने के लिए और जीत की रकम को यूजर्स तक पहुंचाने के लिए पैनल ऑपरेटरों के एक विशेष नेटवर्क का इस्तेमाल किया था. इस दौरान UPI, नेट बैंकिंग, डिजिटल वॉलेट और चोरी की पहचान से खोले गए बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया.
इसके बाद इस कमाई के एक हिस्से को पहले नकदी में तब्दील किया गया और हवाला के माध्यम से विदेश भेजा गया. वहीं, बाद में वही पैसा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से वैध विदेशी निवेश का रूप धारण कर वापस भारत आ गया.
डिजिटल हवाला ने बढ़ाई चुनौती
गौरतलब है कि FATF का मानना है कि अनौपचारिक प्रणालियां अक्सर प्रवासी श्रमिकों के पैसे भेजने की वास्तविक जरूरतों को पूरा करती हैं, लेकिन इस बात विशेष ध्यान रखना चाहिए कि बिना लाइसेंस के हवाला सेवाएं चलाना एक अपराध है.
FATF की रिपोर्ट में डिजिटल हवाला की ओर बढ़ते चलन का भी उल्लख है. कुछ जांच में पाया गया है कि अब ये ऑपरेटर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यानी WhatsApp और Telegram जैसे ऐप पर अपना नेटवर्क चलाते हैं.







