कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बनी 136 साल पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद (बैंकरा मस्जिद) में बाहरी लोगों की एंट्री रोकने के फैसले ने बंगाल की सियासत को गरमा दिया है. एयरपोर्ट अथॉरिटी ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर गेट नंबर 8 से होने वाली एंट्री को बंद कर दिया है. इस फैसले के बाद राज्य की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी और विपक्षी टीएमसी के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है. बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जहां इसे देश की सुरक्षा से जुड़ा जरूरी कदम बताया है, वहीं टीएमसी सांसदों और मुस्लिम संगठनों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है.
कोलकाता एयरपोर्ट के रनवे के विस्तार का काम चल रहा है. इसी निर्माण स्थल के बिल्कुल पास 136 साल पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद स्थित है, जिसे स्थानीय लोग बैंकरा मस्जिद भी कहते हैं. दशकों से यह नियम था कि हर रोज करीब 20 से 30 स्थानीय लोगों को सीआईएसएफ (CISF) की सुरक्षा में बस के जरिए गेट नंबर 8 से मस्जिद के अंदर नमाज पढ़ने के लिए ले जाया जाता था. लेकिन पिछले शुक्रवार को अचानक सुरक्षा कारणों और मरम्मत का हवाला देकर इस एंट्री को रोक दिया गया. अधिकारियों ने पहले इसे तीन दिनों की अस्थायी रोक बताया था, लेकिन सोमवार को भी किसी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई, जिसके बाद विवाद भड़क उठा.
सुरक्षा हमारे लिए सबसे पहली प्राथमिकता है. मुख्यमंत्री ने भौगोलिक संवेदनशीलता का जिक्र करते हुए कहा कि हमारा राज्य चीन और बांग्लादेश के बेहद करीब है. यह एक बेहद संवेदनशील इलाका है और इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल हमारी सेना भी करती है. ऐसे में किसी भी बाहरी और अनधिकृत नागरिक को इस हाई-सिक्योरिटी जोन में बिना पुख्ता सुरक्षा जांच के आने-जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा.
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख ने क्या कहा?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद की बंगाल इकाई के प्रमुख और पूर्व राज्य मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने भी इस कदम को गलत ठहराया है. उन्होंने कहा कि हर कोई जानता है कि एयरपोर्ट एक हाई-सिक्योरिटी जोन है, लेकिन आज तक वहां सुरक्षा में सेंध लगाने की कोई भी घटना नहीं हुई है. फिर अचानक गेट नंबर 8 को बंद करके लोगों को परेशान क्यों किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि वे इस मामले में एयरपोर्ट अथॉरिटी से मिलेंगे और केंद्र सरकार से भी इस पर सफाई मांगेंगे.
टीएमसी ने जताई कड़ी आपत्ति
दूसरी तरफ टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने अचानक लिए गए इस फैसले का कड़ा विरोध किया है. उनका कहना है कि दशकों से चली आ रही इस व्यवस्था को अचानक बंद कर देना ठीक नहीं है. अगर मस्जिद को किसी दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात चल रही थी, तो इसके लिए पहले मुस्लिम समुदाय के लोगों को भरोसे में लेना चाहिए था और उनसे बातचीत की जानी चाहिए थी.
सुरक्षा एजेंसियों ने क्या कहा?
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि एयरपोर्ट के सबसे संवेदनशील ‘लेवल 3’ सुरक्षा क्षेत्र में बिना किसी बायोमेट्रिक पास या कड़े बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के केवल आधार कार्ड के सहारे लोगों को आने देना सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा था. इसके अलावा, मस्जिद की मौजूदा स्थिति की वजह से रनवे का पूरा इस्तेमाल करने और आधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) लगाने में भी दिक्कतें आ रही थीं.








