नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक अजित पवार के निधन को अभी मुश्किल से 6 महीने ही बीते हैं कि पार्टी के भीतर एक बहुत बड़ा अंदरूनी संकट और ‘पावर वैक्यूम’ खुलकर सामने आ गया है. पार्टी की मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के चुनाव को अब अपनों ने ही अदालत में घसीटने की तैयारी कर ली है.
NCP के पूर्व राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष चुने जाने की वैधता पर गंभीर सवाल उठाते हुए 7 पन्नों का लीगल नोटिस भेजा है. ये नोटिस सुनेत्रा पवार, वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और पार्टी के महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को थमाया गया है. नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर 15 दिनों के भीतर इस पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो मामला अदालत जाएगा.
लीगल नोटिस में गंभीर आरोप
सच्चिदानंद सिंह ने अपने लीगल नोटिस में पार्टी के भीतर हुए इस चुनाव को पूरी तरह से असंवैधानिक और संदिग्ध बताया है. उनके तर्क निम्नलिखित हैं कि
1. कार्यकारी अध्यक्ष को किया बाईपास: नोटिस के मुताबिक, 28 जनवरी को अजित पवार की मौत के बाद पार्टी के बदले हुए संविधान के तहत वर्किंग प्रेसिडेंट प्रफुल्ल पटेल को नए चुनाव होने तक कार्यवाहक अध्यक्ष (Officiating Chief) के रूप में काम करना था.
2. मनमानी प्रक्रिया: आरोप है कि महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने 18 फरवरी को प्रफुल्ल पटेल की बिना मंजूरी के ही नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी.
3. चुनाव रद्द करने की मांग: सिंह ने सुनेत्रा पवार के चुनाव को तुरंत रद्द और अमान्य घोषित करने की मांग की है, साथ ही पूरी पार्टी में नए सिरे से सांगठनिक चुनाव कराने की अपील की है.
अजित पवार के बाद पार्टी में लीडरशिप की भारी कमी
इस अंदरूनी कलह को तब और हवा मिल गई जब पार्टी के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक प्रफुल्ल पटेल ने सोमवार को सार्वजनिक रूप से एक ऐसा बयान दे दिया, जिसने सबको चौंका दिया.
प्रफुल्ल पटेल ने खुले मंच से माना कि अजित पवार के निधन के बाद राकांपा (NCP) में लीडरशिप की भारी कमी (वैक्यूम) है. अगर पार्टी को भविष्य की राजनीति में प्रासंगिक बने रहना है, तो हमें तुरंत बड़े ‘सुधार के उपायों’ की जरूरत है. अजित पवार की मौत के बाद यह पहली बार है जब शीर्ष नेतृत्व के किसी इतने बड़े नेता ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि पार्टी के सांगठनिक ढांचे में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है.
टाइपिंग मिस्टेक या सोची-समझी साजिश?
पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सुनेत्रा पवार के कमान संभालने के तुरंत बाद चुनाव आयोग (EC) को पदाधिकारियों की एक नई लिस्ट सौंपी गई थी. इस लिस्ट में प्रफुल्ल पटेल और महाराष्ट्र यूनिट के अध्यक्ष सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेताओं के आधिकारिक पदनाम ही गायब थे. हालांकि, विवाद बढ़ने पर पार्टी ने इसे टाइपिंग की गलती बताकर पल्ला झाड़ लिया, लेकिन सीनियर नेताओं के बीच इसे लेकर नाराजगी और अविश्वास गहरा गया है.
NCP का पलटवार: यह सिर्फ सनसनी फैलाने की कोशिश
पार्टी के भीतर मचे इस घमासान पर अब सुनेत्रा पवार गुट की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है. NCP के आधिकारिक प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. चव्हाण ने कहा कि सुनेत्रा पवार का चुनाव पार्टी के संविधान और चुनाव आयोग की गाइडलाइंस के मुताबिक पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी तरीके से हुआ था. सभी डेलीगेट्स ने एकमत से उन्हें अपना अध्यक्ष चुना है. यह लीगल नोटिस सिर्फ और सिर्फ मीडिया में सनसनी फैलाने की एक नाकाम कोशिश है.
बता दें कि अजित पवार के जाने के बाद पार्टी में जो लीडरशिप ट्रांजिशन (कमान सौंपने की प्रक्रिया) चल रही थी, वह अब अपने सबसे कठिन दौर में पहुंच चुकी है. एक तरफ कानूनी लड़ाई का खतरा है, तो दूसरी तरफ अपने ही बड़े नेताओं के बगावती सुर, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति में नया सस्पेंस पैदा कर दिया है.








