इंडियन इकोनॉमी के मोर्चे पर बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है. अप्रैल महीने में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर बेस्ड महंगाई दर उछलकर 8.3% के लेवल पर पहुंच गई है. महंगाई दर में आए इस भारी उछाल के पीछे का अहम करण ग्लोबल लेवल पर ईंधन और बिजली की कीमत में आई जबरदस्त तेजी को माना जा रहा है. थोक महंगाई दर (WPI) का यह आंकड़ा उम्मीद से कहीं ज्यादा है. इससे न केवल सरकार बल्कि आम आदमी और आरबीआई (RBI) के लिए भी भविष्य की चुनौतियों के संकेत मिल रहे हैं.
अप्रैल में थोक महंगाई दर बढ़ने का सबसे बड़ा कारण ‘फ्यूल और पावर’ सेगमेंट रहा. इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमत में चल रही उठा-पटक और सप्लाई चेन टूटने के कारण घरेलू लेवल पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की थोक दरों में भारी इजाफा देखा गया. रिपोर्ट के अनुसार फ्यूल और पॉवर सेक्टर की महंगाई दर ने डबल डिजिट के आंकड़े को छू लिया है. इसका सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) सेक्टर पर पड़ रहा है.
थोक महंगाई में कितना इजाफा?
अप्रैल महीने में WPI महंगाई दर बढ़कर दोगुने के पार चली गई है. मार्च के महीने WPI 3.88% पर था, जो कि अब बढ़कर 8.30% के आंकड़े पर पहुंच गया. महंगाई दर में यह इजाफा एनर्जी और क्रूड ऑयल कीमत में तेजी की वजह से हुआ है. फ्यूल एंड पावर कैटेगरी में सबसे ज्यादा इजाफा देखा गया. इस कैटेगरी में महंगाई दर 1.05% से बढ़कर 24.71% पर पहुंच गई. वेस्ट एशिया में जारी टेंशन और क्रूड की बढ़ती कीमत का असर असर घरेलू लागत पर भी दिखाई देने लगा है.
खाने-पीने की चीजों पर दिख रहा असर
महंगाई की मार केवल पेट्रोल-डीजल तक ही सीमित नहीं है. इसका असर खाने-पीने की चीजों और कारखानों में बनने वाले सामान के दाम पर भी देखा गया. अनाज, सब्जियों और फलों के होलसेल प्राइस में इजाफा होने से ‘प्राइमरी आर्टिकल्स’ की महंगाई दर भी ऊपर बनी हुई है. दूसरी तरफ कच्चे माल की लागत बढ़ने से स्टील, सीमेंट और केमिकल से तैयार होने वाले प्रोडक्ट के रेट में भी इजाफा हुआ है. कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ बोझ धीरे-धीरे ग्राहकों पर डालना शुरू कर रही हैं.








