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गाड़ी का तेल तो ठीक, युद्ध से कड़ाही के तेल में क्या दिक्कत? आपके ‘समोसा-जलेबी का बिल’ ₹1.61 लाख करोड़,खाने में तेल कम तो सुधरेगी इकोनॉमी

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अमेरिका-ईरान युद्ध का असर अब व्यापक तौर पर भारत में देखा जा रहा है. खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोगों से बचत की अपील कर रहे हैं. पेट्रोल-डीजल से लेकर कच्चे तेल की बचत की अपील की जा रही है. लोगों ने सालभर सोना नहीं खरीदने की सलाह दी जा रही है. प्रधानमंत्री ने बीते 24 घंटे में दूसरी बार लोगों से तेल की खपत को कम करने और सोना खरीदने सो रुकने की सलाह दी है. पेट्रोल-डीजल के बीच लोगों को खाने के तेल की खपत भी घटाने की सलाह दी है. यानी पकौड़ा, समोसा, जलेबी जैसी तली-भुनी चीजें देश की इकोनॉमी को झटका दे रही हैं.

खाने वाली तेल पर कितना खर्च करता है भारत ?
आपकी रसोई में इस्तेमाल होने वाली कुकिंग ऑयल यानी खाने वाले तेल का 60 फीसदी दूसरे देशों से आयात किया जाता है. इस इंपोर्ट पर भारी बिल चुकाया जाता है, जो भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार को नुकसान पहुंचाता है. साल 2025-26 में भारत ने 19.5 अरब डॉलर का कुकिंग ऑयल आयात किया था.यानी आपके पकौड़े-समोसे के चक्कर में देश का बहुत सारा पैसा बाहर चला गया, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा है. देश का करंट अकाउंट डेफिसिट को होने के साथ-साथ भारतीय करेंसी रुपये पर भारी प्रेशर देखा जा रहा है.

कुकिंग ऑयल की खरीद कम करने से इकोनॉमी को कैसे फायदा होगा ?
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुसार साल 2024‑25 में भारत ने करीब 1.60 करोड़ टन कुकिंग ऑयल इंपोर्ट किया. जिसपर 19.3 अरब डॉलर का खर्च किया गया. यानी ये पैसा भारतीय खजाने से निकाल. जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर लोड बढ़ रहा है. युद्ध की वजह से महंगा कच्चा तेल खरीदना पड़ रहा है, जो भारत के इंपोर्ट बिल को लगातार बढ़ा रहा है.

भारत कितना कुकिंग ऑयल आयात करता है ?
1. साल 2024-25 में भारत ने 1.60 करोड़ टन खाने का तेल आयात किया.
2. पाम तेल 80-85 लाख टन
3. सोयाबीन तेल 50-55 लाख टन
4. सूरजमुखी तेल 28-30 लाख टन
5. आयातक देश: इंडोनेशिया, मलेशिया, अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन

सोना, तेल, खाद और खाद्य तेल पर कितना खर्च करता है भारत ?
पीएम मोदी ने 4 कमोडिटीज यानी कच्चा तेल, सोना, खाद और खाने के तेल की खपत को कम करने की अपील की है. बता दें कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने इन 4 कमोडिटीज के आयात पर करीब 240 अरब डॉलर से ज्यादा का खर्च किया है. देश के कुल आयात में इन 4 चीजों की हिस्सेदारी 31.1 फीसदी की है. वित्त वर्ष 2025-26 में ….

1. कच्चे तेल के आयात पर 240.7 अरब डॉलर
2. सोने के आयात पर 72 अरब डॉलर
3. वनस्पति तेल के आयात पर 19.5 अरब डॉलर
4. खाद के आयात पर 14.5 अरब डॉलर का खर्च किया है.

अगर मान लें पीएम मोदी की बात तो भारत कितना बचा लेगा ?
जाहिर है कि अगर लोग संकट के इस दौर में प्रधानमंत्री की बात मानकर इन 4 कमोडिटीज की खपत को समझदारी से करें तो भारत का आयात बिल घटेगा. भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर खर्च कम होगा. भारतीय करेंसी पर दबाव कम होगा. देश की इकोनॉमी को इस संकट के बीच मजबूती मिलेगी. पश्चिम एशिया युद्ध की वजह से भारत की मुश्किल बढ़ रही है. 70.99 डॉलर प्रति बैरल पर बिकने वाले कच्चे तेल का बास्केट भारत के लिए मई में 105.4 डॉलर प्रति बैरल रहा. भारत ईरान की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से होने वाले आयातित सामानों पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है. वैश्विक संकट के बीच आयात को कम कर इकोनॉमी को बचाने की कोशिश की जा रही है . मौजूदा जियोपॉलिटिकल तनाव के चलते डॉलर मजबूत हो रहा है, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Indias Forex Reserve) पर दबाव बढ़ रहा है .

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी कितना है?
1 मई 2026 को समाप्त हुए हफ्ते में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 7.7 अरब अमेरिकी डॉलर की गिरावट के साथ 690 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया. अप्रैल 2026 के मिड तक यह 700 अरब डॉलर के पार पहुंच गया था. वहीं भारत का गोल्ड रिजर्व 880 टन का है .

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Author: admin

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