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‘विरासत को तहस-नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती’, रोहिणी आचार्य का फिर छलका दर्द

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राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की सियासत में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान और फैसलों को लेकर उठते सवालों के बीच आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य का एक और पोस्ट सामने आया है. रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपने बयान में ‘विरासत’, ‘पहचान’, ‘वजूद’ और ‘अपनों की साजिश’ को लेकर लिखा है.

विरासत और अपनों पर सवाल

रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में लिखा, “बड़ी शिद्दत से बनायी और खड़ी की गयी “बड़ी विरासत” को तहस-नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, ‘अपने’ और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी ‘नए बने अपने’ ही काफी होते हैं.”

पहचान और वजूद पर चोट

अपने बयान में रोहिणी आगे लिखा, “हैरानी तो तब होती है , जब जिसकी वजह से पहचान होती है, जिसकी वजह से वजूद होता है, उस पहचान, उस वजूद के निशान को बहकावे में आ कर मिटाने और हटाने पर अपने ही आमादा हो जाते हैं.”

यह बात साफ तौर पर यह संदेश देती है कि जिन मूल विचारों और संघर्षों से पार्टी खड़ी हुई, उन्हीं को भुलाने की कोशिश हो रही है.

विवेक और अहंकार की चेतावनी

पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, “जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, अहंकार सिर पर चढ़ जाता है.  तब विनाशक ही आँख-नाक और कान बन बुद्धि-विवेक हर लेता है.”

रोहिणी आचार्य की इस पोस्ट के बाद आरजेडी की अंदरूनी राजनीति पर फिर से सवाल उठने लगे हैं. हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन संकेतों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है. उनके बयान को सियासी गलियारों में इसे बेहद अहम माना जा रहा है.

बिना किसी व्यक्ति का नाम लिए उनके शब्द सीधे तौर पर यह सवाल खड़े करते हैं कि क्या पार्टी की नींव, उसका संघर्ष और वर्षों में बनी पहचान आज खुद अपनों के हाथों कमजोर की जा रही है.

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Author: admin

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