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‘पीएम मोदी ने जो किया वह ज्यादा मुश्किल है’, पंडित नेहरू से इस मामले में तुलना कर यह क्या बोल गए राघव चड्ढा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्वाचित पीएम के तौर पर 12 साल से अधिक का समय पूरा कर लिया है. इसके साथ ही उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है. पीएम मोदी के इस रिकॉर्ड बनाने पर भारतीय जनता पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा है कि आज इतिहास रचा गया है. उन्होंने पंडित नेहरू और पीएम मोदी के कार्यकालों की एक तुलना भी की है.

सांसद ने लिखा- आज इतिहास रचा गया है. 10 जून 2026 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पद पर लगातार 4,399 दिन पूरे किए. इस तरह उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के कार्यकाल को पीछे छोड़ दिया और हमारे गणतंत्र के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बन गए. एक पल रुककर सोचिए कि इसका असल में क्या मतलब है.

उन्होंने लिखा कि भारत कोई आम देश नहीं है. यह 140 करोड़ लोगों की एक सभ्यता है. यह 22 अनुसूचित भाषाओं और सैकड़ों बोलियों; कई धर्मों, जातियों, समुदायों और पंथों; और अनगिनत क्षेत्रों व जीवन-शैलियों वाले लोगों की धरती है, जो एक साथ रहते हैं. हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, जहाँ लगभग 98 करोड़ मतदाता हैं-जो पूरे यूरोप की आबादी से भी ज़्यादा है. यह हमारे देश में होने वाली चुनावी प्रक्रिया को शायद दुनिया की सबसे जटिल चुनावी प्रक्रिया बनाता है.

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सांसद ने लिखा कि और फिर भी, इन 140 करोड़ लोगों ने बार-बार इसी नेता को देश की बागडोर सौंपी है: 2014 में, 2019 में और 2024 में. भारत की जनता से लगातार तीन बार जनादेश मिला, और हर बार यह भरोसे की एक नई मिसाल थी. इतने विशाल और विविधतापूर्ण देश का भरोसा एक बार जीतना भी बड़ी बात है. बिना किसी रुकावट के तीन बार यह भरोसा जीतना तो असाधारण है.

प्रधानमंत्री के अथक समर्पण को सलाम- राघव चड्ढा

पीएम मोदी और पंडित नेहरू के बीच तुलना करते हुए राघव ने लिखा कि इस बात पर भी गौर करें कि ये दोनों दौर कितने अलग-अलग हैं. पंडित नेहरू को जनादेश गणतंत्र के शुरुआती दशकों में मिला था-एक ऐसा दौर जब एक ही पार्टी का दबदबा था और कांग्रेस एक युवा और बिखरे हुए विपक्ष के मुकाबले बहुत मज़बूत स्थिति में थी. वहीं, नरेंद्र मोदी को जनादेश एक कहीं ज़्यादा चुनौतीपूर्ण लोकतंत्र में मिला है: गठबंधन का दौर, मज़बूत क्षेत्रीय ताक़तें और कई पार्टियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा. और उन्होंने इस चुनौती का पूरी तरह से सामना किया है: 2014 और 2019 में अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया (1984 के बाद पहली बार किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला).

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चड्ढा ने लिखा कि और फिर 2024 में एक विजयी गठबंधन बनाया और उसका नेतृत्व किया. इतने कड़े मुकाबले वाले देश का भरोसा बार-बार जीतना, किसी भी पैमाने पर एक कहीं ज़्यादा बड़ी उपलब्धि है. इस ऐतिहासिक अवसर पर, मैं भारतीय मतदाताओं की समझदारी को नमन करता हूं और देश के प्रति प्रधानमंत्री के अथक समर्पण को सलाम करता हूं. ईश्वर उन्हें उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करे, और भारत की जनता हमारी मातृभूमि की सेवा के लिए उन्हें और भी कई बार जनादेश दे.

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