पश्चिम बंगाल में नई बीजेपी सरकार बनने के बाद सीएम शुभेंदु अधिकारी लगातार बड़े और सख्त फैसले ले रहे हैं. शुभेंदु सरकार ने अब स्कूलों के बाद राज्य के सभी मदरसों में भी प्रार्थना के समय ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है. यह आदेश सरकारी सहायता प्राप्त और गैर-सरकारी सभी मदरसों पर लागू होगा.
सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, मदरसों में होने वाली प्रार्थना सभा में सभी छात्रों और कर्मचारियों को ‘वंदे मातरम्’ गाना होगा. सरकार का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रभक्ति और एकता की भावना को मजबूत करने के लिए लिया गया है. लेकिन, इस फैसले को लेकर विपक्ष और कुछ संगठनों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. नोटिफिकेशन में कहा गया है कि धार्मिक शिक्षण संस्थानों पर इस तरह का आदेश लागू करना विवाद को जन्म दे सकता है.
‘वंदे मातरम’ को लेकर क्यों है विवाद
दरअसल, देश में ‘वंदे मातरम’ को लेकर पहले से ही एक विवाद चल रहा है. मुस्लिम समुदाय के सदस्यों का तर्क है कि वे केवल एक ही ईश्वर की इबादत करते हैं. इसलिए, वे किसी और की स्तुति नहीं करेंगे. मुस्लिम संगठन ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं और उन्होंने तो यहां तक कह दिया है कि वे इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे. हाल ही में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने टिप्पणी की कि ‘वंदे मातरम’ जैसे एक विवादित गीत को ‘राष्ट्रीय गीत’ का दर्जा दे दिया गया है और भाजपा-शासित राज्यों में इसका प्रतिदिन गायन अनिवार्य किया जा रहा है. संविधान की शपथ लेकर सत्ता में बैठे लोग मुसलमानों के खिलाफ नफरत घोल रहे हैं.
मौलाना मदनी का गंभीर आरोप
मौलाना मदनी ने आरोप लगाया था कि दूसरी तरफ, मस्जिदों, मक़बरों और मदरसों को ‘अवैध’ होने के बहाने गिराया जा रहा है और मदरसों के खिलाफ लगातार नए-नए आदेश जारी किए जा रहे हैं. मानो वे शिक्षण संस्थान न होकर, बल्कि गैर-कानूनी गतिविधियों के अड्डे हों. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मुस्लिम समुदाय न तो कभी झुका है और न ही कभी झुकेगा. पहले मुसलमान निशाने पर थे. लेकिन अब तो स्वयं इस्लाम को ही निशाना बनाया जा रहा है. मौलाना मदनी ने आरोप लगाया कि पहले की सरकारों ने मुसलमानों को नुकसान पहुंचाया, जबकि मौजूदा सरकार इस्लाम को नुकसान पहुंचाना चाहती है. मौलाना ने कहा कि देश में नफरत की राजनीति अब डर और धमकी की राजनीति में बदल गई है.








