मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य स्थिति को मजबूत करने का बड़ा फैसला लिया है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार करीब 2,500 मरीन सैनिकों और एक बड़े वॉरशिप को मिडिल ईस्ट की ओर भेजने का आदेश दिया गया है. ABP की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका मरीन कारपोरेशन की 31st Marine Expeditionary Unit के सैनिकों और USS Tripoli (LHA-7) को मिडिल ईस्ट की ओर रवाना किया जा रहा है. अधिकारियों ने बताया कि करीब 2,500 मरीन सैनिक इस मिशन का हिस्सा होंगे. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस तैनाती का मतलब यह नहीं है कि तुरंत कोई जमीनी सैन्य अभियान शुरू होने वाला है. मरीन यूनिट को आमतौर पर संकट की स्थिति में मदद पहुंचाने के लिए तैयार रखा जाता है. ये सैनिक दूतावासों की सुरक्षा, नागरिकों को सुरक्षित निकालने और मानवीय सहायता जैसे मिशनों में भी काम करते हैं.
अमेरिकन मरीन यूनिट और USS Tripoli (LHA-7) फिलहाल जापान में तैनात हैं और हाल के दिनों में प्रशांत महासागर में मौजूद थे. अधिकारियों के अनुसार इन जहाजों को ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्र तक पहुंचने में एक सप्ताह से अधिक समय लग सकता है. यह तैनाती ऐसे समय में हो रही है, जब पूरे मिडिल ईस्ट में जंग तेजी से बढ़ रहा है. ईरान पर आरोप है कि उसने इजरायल और खाड़ी के कई देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. इस वजह से ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी प्रभावी रूप से बंद कर दिया है. यह रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल रूट में से एक है, जहां से ग्लोबल ऑयल मार्केट का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है.
अमेरिकन नेवी के 12 जहाज अरब सागर में तैनात
अमेरिकन नेवी के 12 जहाज अरब सागर में पहले से ही तैनात थे. इनमें विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln (CVN-72) और 8 डिस्ट्रॉयर वॉरशिप शामिल हैं. अगर USS Tripoli (LHA-7) भी इस बेड़े में शामिल हो जाता है तो यह उस क्षेत्र में दूसरा सबसे बड़ा अमेरिकी वॉरशिप होगा. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने वाशिंगटन में कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी सेना ने 15,000 से ज्यादा दुश्मन ठिकानों पर हमले किए हैं. उनके अनुसार औसतन हर दिन 1,000 से अधिक हमले किए जा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है और अमेरिकी सेना इस स्थिति से निपट रही है.









