कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और AISA ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की. हालांकि, जैसे ही प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू हुई, वहां हंगामा होने लगा. कुछ लोग बंद करो के नारे लगाते हुए नजर आए. नेहा बोरा ने कहा कि यह लड़ाई दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर मुंबई के शिवाजी पार्क और देश के अलग-अलग हिस्सों में जारी है. लोगों को हिरासत में लेने से, मारपीट करने से आंदोलन नहीं रुकेगा.
इधर, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि सीजेपी 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस पर फिर से प्रोटेस्ट करेगी.
ज्ञानेश कुमार किसी की नहीं सुन रहे: दीपके
अभिजीत दीपके ने कहा कि एक अखबार की रिपोर्ट आई है. जहां पर खुलासा हुआ है कि ज्ञानेश कुमार किसी की नहीं सुन रहे हैं. बस अपने पॉलिटिकल मास्टर्स की सुन रहे हैं. पिछले 10-15 दिन से सारे स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशंस, दिल्ली का सारा यूथ सड़कों पर लड़ रहा है. उनको सड़कों पर घसीटा जा रहा है.
दीपके ने कहा कि नेहा को घसीटा गया, आइशी को घसीटा गया, विराज को घसीटा गया, ईशना को घसीटा गया. किसके लिए? एक ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए. जब इस देश का विपक्ष भी रास्तों पर उतरा है उनको भी डिटेन किया गया है. LOP को भी डिटेन कर दिया गया है. फॉर्मर चीफ मिनिस्टर जब रास्ते पर उतरे थे, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, पिनाराई विजयन, उनको भी डिटेन किया गया है. किसके लिए? एक ज्ञानेश कुमार के लिए.
इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ: दीपके
दीपके ने कहा कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ हो कि रेलवेज बंद कर दिए. रेलवेज. किसके लिए? एक ज्ञानेश कुमार के लिए. रेलवेज बंद करके मन नहीं भरा तो क्या किया? मेट्रोस बंद कर दी, पूरे दिल्ली के मेट्रो स्टेशन्स बंद कर दिए, किसके लिए? ज्ञानेश कुमार के लिए. उससे मन नहीं भरा, जम्मू कश्मीर से फोर्सेस बुला लीं. नक्सल प्रो एरियाज से फोर्सेस बुला लीं, किसके लिए? एक ज्ञानेश कुमार के लिए. ये क्यों हो रहा है? ज्ञानेश कुमार ऐसा क्या दे रहे हैं नरेंद्र मोदी को ? तिरंगे को भी आपने वॉयलेशन ऑफ लॉ बता दिया, किसके लिए? ज्ञानेश कुमार के लिए.
यह लड़ाई भारत के आम-गरीब परिवारों में जिंदा है: नेहा
नेहा बोरा ने कहा कि यह लड़ाई भारत के आम और गरीब परिवारों में जिंदा है. देश के अलग-अलग कोनों में फ्रीडम पार्क, दिल्ली के जंतर-मंतर और मुंबई के शिवाजी पार्क में यह लड़ाई जारी रहेगी. इसके अलावा नेहा ने कहा कि पत्रकारों को हैरसमेंट किया गया. प्रेस कार्ड होने के बावजूद कवर नहीं करने दिया गया. दिल्ली की सड़कों पर आम आवाम को घसीटा गया. हमारा मूवमेंट इससे रुकेगा नहीं.








