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नेपाल के सुनसरी में भड़की हिंसा, जला दीं 36 दुकानें, सेना भी पीछे हटने को मजबूर; विराटनगर तक पहुंचीं लपटें

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नेपाल के सुनसरी जिले के देवागंज (कप्तानगंज) में सावन के बोलबम यात्रा के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने और धार्मिक झंडा लगाने को लेकर दो समुदायों के बीच भीषण सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी है. इस उपद्रव को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सशस्त्र सुरक्षा बलों द्वारा की गई फायरिंग में 24 वर्षीय युवक ओम प्रकाश मेहता की गोली लगने से मौत हो गई, जिसके बाद हालात पूरी तरह बेकाबू हो गए हैं.

नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड-3 स्थित कप्तानगंज में 26 जुलाई की देर रात एक मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया. मंदिर के बाहर तेज आवाज में बज रहे डीजे को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई, लेकिन कुछ ही देर में मामला पत्थरबाजी और पुलिस फायरिंग तक पहुंच गया. घटना में 24 वर्षीय ओम प्रकाश मेहता की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि करीब दो दर्जन लोग घायल हुए. हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन ने इलाके के कई संवेदनशील बाजारों में कर्फ्यू और कर्फ्यू लागू कर दिया गया.

झंडा बदलने की घटना ने पहले ही बढ़ा दिया था तनाव

पुलिस के अनुसार, रात की हिंसा से पहले दिन में एक और विवाद सामने आया था. स्थानीय बिजली के खंभे पर लगा मुस्लिम समुदाय का झंडा हटाकर उसकी जगह हिंदू धर्म का झंडा लगा दिया गया था. इसी मुद्दे को लेकर दोनों समुदायों के बीच पहले से तनाव बना हुआ था. रात करीब साढ़े दस बजे मंदिर के पास तेज आवाज में बज रहे डीजे को लेकर बहस शुरू हुई. शुरुआत में कुछ युवकों के बीच हुई नोकझोंक देखते ही देखते भीड़ में बदल गई और दोनों ओर से पत्थर फेंके जाने लगे.

हालात काबू से बाहर होने पर पुलिस ने की फायरिंग

स्थानीय पुलिस चौकी ने पहले भीड़ को समझाने की कोशिश की, लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ती गई. इसके बाद नेपाल पुलिस ने चेतावनी स्वरूप गोलियां चलाईं और सशस्त्र पुलिस बल ने भी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए फायरिंग की. अधिकारियों का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ओम प्रकाश मेहता की मौत किस गोली से हुई. बढ़ती हिंसा को देखते हुए कोशी प्रांत के अन्य इलाकों से अतिरिक्त सुरक्षा बल बुलाए गए.

कितने लोग घायल हुए?

पुलिस के मुताबिक, इस हिंसा में नेपाल पुलिस के 10 जवान और सशस्त्र पुलिस बल के 5 कर्मी घायल हुए हैं. इनमें एक पुलिस इंस्पेक्टर भी शामिल हैं. इसके अलावा कई स्थानीय नागरिक भी घायल हुए, जिनमें कुछ को गोली लगी है. घायलों का इलाज बिराटनगर और सुनसरी के अस्पतालों में चल रहा है. अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में घायलों की संख्या 16 से 24 के बीच बताई गई है.

कप्तानगंज क्यों है संवेदनशील इलाका?

कप्तानगंज, सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका में स्थित है और भारत के बिहार सीमा से कुछ ही किलोमीटर दूर है. यहां के लोगों का भारत से व्यापार, रिश्तेदारी और रोजमर्रा का आवागमन सामान्य बात है. इलाके में कुशवाहा, यादव और मुस्लिम समुदाय की अच्छी-खासी आबादी रहती है. अधिकांश समय लोग साथ मिलकर रहते हैं, लेकिन धार्मिक प्रतीकों, झंडों या जुलूस जैसे मुद्दों पर तनाव तेजी से बढ़ जाता है.

हिंसा के बाद सेना भी उतारी गई

रविवार रात की घटना के बाद सोमवार सुबह विरोध प्रदर्शन अन्य इलाकों तक फैल गया. कई स्थानों पर टायर जलाए गए, दुकानों में तोड़फोड़ हुई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया. स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन ने नेपाल सेना की टुकड़ियां और बख्तरबंद वाहन भी तैनात किए. सेना की मौजूदगी के बाद हालात धीरे-धीरे नियंत्रण में आए.

विपक्ष ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद लाल विक्रम थापा ने घटनास्थल का दौरा कर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए. उनका कहना था कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले गैर-घातक उपाय अपनाए जाने चाहिए थे. वहीं राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी की मुख्य सचेतक खुशबू ओली ने प्रशासनिक विफलता को इस घटना का प्रमुख कारण बताया. उन्होंने कहा कि समय रहते हालात को संभाला जाता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती.

गृह मंत्रालय ने बनाई जांच समिति

नेपाल के गृह मंत्री सुधन गुरूंग ने काठमांडू में केंद्रीय सुरक्षा समिति की आपात बैठक बुलाई. बैठक में सीमा क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था, खुफिया तंत्र और पुलिस की कार्रवाई की समीक्षा की गई. साथ ही गृह मंत्रालय ने संयुक्त सचिव भूपेंद्र थापा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है. समिति को सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.

तराई क्षेत्र में पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

नेपाल का तराई क्षेत्र पहले भी कई बार हिंसक झड़पों का गवाह बन चुका है. वर्ष 2007 का गौर नरसंहार, कपिलवस्तु हिंसा और 2015 की टीकापुर घटना इस क्षेत्र के बड़े हिंसक घटनाक्रमों में शामिल हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन घटनाओं की जड़ें अलग-अलग रही हैं, लेकिन एक समानता यह है कि छोटी घटनाएं भी भीड़ और कमजोर नियंत्रण व्यवस्था के कारण बड़े संघर्ष में बदल जाती हैं.

नेपाल में मुस्लिम आबादी कितनी है?

2021 की जनगणना के अनुसार, नेपाल की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 5 प्रतिशत है. हालांकि मधेश और तराई के कई जिलों में यह अनुपात राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है. सुनसरी, धनुषा, रौतहट, पर्सा और सरलाई जैसे सीमावर्ती जिलों में हिंदू और मुस्लिम समुदाय लंबे समय से साथ रहते आए हैं. इन इलाकों के कई परिवारों के भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश से भी पारिवारिक और कारोबारी संबंध हैं.

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