देश की सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले बेंगलुरु से एक बेहद विचलित और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां कैपजेमिनी (Capgemini) के कैंपस के भीतर चल रहे एक नामी कॉरपोरेट डेकेयर सेंटर (क्रेच) में मासूम बच्चों के साथ बेरहमी और मानसिक प्रताड़ना का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है. इस घटना का एक खौफनाक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आईटी हब के वर्किंग-पेरेंट्स और आम नागरिकों में भारी आक्रोश है.
पुलिस के मुताबिक, सामने आए सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि डेकेयर के केयरगिवर्स महज दो से तीन साल के उन मासूम बच्चों को बुरी तरह धमका रहे हैं, मार रहे हैं और टॉर्चर कर रहे हैं जो ठीक से बोलना भी नहीं जानते. जब भी बच्चे रोते या परेशान करते, आया और केयरगिवर्स उन पर टूट पड़ते थे.
फेसबुक-लिंक्डइन पर फूटा वर्किंग मदर्स का गुस्सा
इस अमानवीय हरकत के सामने आने के बाद कॉर्पोरेट एम्प्लॉइज और वर्किंग मदर्स के सोशल मीडिया ग्रुप्स पर आंसुओं और गुस्से का सैलाब आ गया है. एक बेबस मां ने फेसबुक ग्रुप पर लिखा कि काश यह वीडियो AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बना कोई फेक वीडियो होता और असली नहीं होता! यकीन नहीं होता कि इंसानों के भेस में ऐसे जानवर हमारे बच्चों के आसपास हैं.
आज के दौर में जहां पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं, वहां ऑफिस के भीतर बने ये क्रेच एक बड़ी जरूरत बन चुके हैं. खासकर तब, जब कंपनियां वर्क-फ्रॉम-होम खत्म करके कर्मचारियों को वापस ऑफिस बुला रही हैं. ऐसे में इस घटना ने टेकर्स का भरोसा तार-तार कर दिया है.
‘जो बोल नहीं सकते, वो अपना दर्द कैसे बताएं?
इस घटना ने वर्कप्लेस चाइल्डकेयर सेंटर्स में सुरक्षा और निगरानी के खोखले दावों की पोल खोल दी है. माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता यह है कि 2-3 साल के टॉडलर्स (छोटे बच्चे) यह बताने की स्थिति में भी नहीं होते कि उनके साथ क्या गलत हुआ है. अक्सर माता-पिता बच्चों के रोने या डेकेयर न जाने की जिद को सामान्य ‘सेपरेशन एंग्जायटी’ या मूड स्विंग्स समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे ऐसे राक्षसी कृत्य छिप जाते हैं.
गुस्साए माता-पिता ने अब कैपजेमिनी और तमाम कॉर्पोरेट कंपनियों के सामने आर-पार की मांगें रख दी हैं:
1. लाइव स्ट्रीमिंग: एम्प्लॉई-पेरेंट्स को मोबाइल ऐप पर पूरे दिन की लाइव सीसीटीवी फीड दी जाए.
2. 24×7 मॉनिटरिंग और बायोमेट्रिक्स: क्रेच के हर कोने (प्राइवेट स्पेस छोड़कर) की अनिवार्य रिकॉर्डिंग हो और बायोमेट्रिक एक्सेस कंट्रोल लगे.
3. कड़ा बैकग्राउंड वेरिफिकेशन: बच्चों की देखभाल करने वाले स्टाफ का कड़ा पुलिस वेरिफिकेशन और साइकोलॉजिकल टेस्ट हो.
4. सरप्राइज इंस्पेक्शन: कंपनियों द्वारा बिना बताए अचानक इन सेंटर्स का थर्ड-पार्टी ऑडिट और औचक निरीक्षण किया जाए.
कॉर्पोरेट्स को अल्टीमेटम
चाइल्ड राइट्स एडवोकेट्स और पेरेंट्स एसोसिएशन का कहना है कि टेक कंपनियां अब डेकेयर सेंटर्स को सिर्फ अपनी वेबसाइट पर दिखाने वाले एक ‘एम्प्लॉई बेनिफिट’ या आकर्षण की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकतीं. बच्चों की सुरक्षा की सीधी जवाबदेही कंपनी प्रशासन की होगी.
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वीडियो के आधार पर केयरगिवर्स के खिलाफ सख्त धाराओं में मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है. हालांकि, पीड़ितों के माता-पिता गहरे सदमे में हैं और उन्होंने अभी तक मीडिया के सामने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. लेकिन बेंगलुरु के इस कांड ने पूरे देश के कॉर्पोरेट जगत को यह साफ संदेश दे दिया है कि वर्कप्लेस पर भरोसा सिर्फ बातों से नहीं, बल्कि सख्त गवर्नेंस और अकाउंटेबिलिटी से वापस आएगा.
बेंगलुरु डेकेयर हॉरर में हुई पहली गिरफ्तारी
इस बीच, आपको बता दें कि टेक पार्क के भीतर मासूम बच्चों के साथ हुई बर्बरता के मामले में बेंगलुरु पुलिस ने बेहद त्वरित कार्रवाई करते हुए पहली बड़ी गिरफ्तारी की है. कैपजेमिनी कैंपस के अंदर चल रहे डेकेयर सेंटर में 2 से 3 साल के बच्चों को बेरहमी से पीटने और प्रताड़ित करने वाली मुख्य आरोपी महिला को पुलिस ने सलाखों के पीछे भेज दिया है.
गिरफ्तार की गई महिला की पहचान विजयलक्ष्मी के रूप में हुई है, जो इसी क्रेच में आया (केयरगिवर) के पद पर तैनात थी. सोशल मीडिया पर वायरल हुए रोंगटे खड़े कर देने वाले सीसीटीवी फुटेज में विजयलक्ष्मी ही मासूम बच्चों को बेरहमी से मारते-पीटते और उन्हें टॉयलेट-वॉशिंग मशीन के पास प्रताड़ित करते हुए दिखाई दी थी.
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट सहित सख्त धाराओं में केस दर्ज
पुलिस ने आरोपी विजयलक्ष्मी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और किशोर न्याय (JJ) अधिनियम की अत्यंत गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. इस हैवानियत में केवल विजयलक्ष्मी ही शामिल नहीं थी, बल्कि पूरा स्टाफ संदेह के घेरे में है. पुलिस ने वीडियो में दिख रहे डेकेयर सेंटर के अन्य कर्मचारियों को भी आधिकारिक नोटिस (समन) जारी कर तुरंत जांच अधिकारी के सामने पेश होने का कड़ा निर्देश दिया है. मामले की गहराई तक जाने के लिए पुलिस ने गुरुवार को तीन अन्य कर्मचारियों को हिरासत में लेकर घंटों पूछताछ की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह टॉर्चर कब से चल रहा था.








