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सीना तानकर होर्मुज से निकला LNG Carrier Disha, 3 महीने के बाद कतर से 62000 टन गैस लेकर भारत आ रहा टैंकर; 13 जहाज अब भी कतार में

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मिडिल ईस्ट से भारत के लिए एक राहत भरी खबर आ रही है. जानकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के चंद घंटों बाद ही दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) में जमी बर्फ पिघलने लगी है. इस समझौते की घोषणा के बाद समंदर के इस ‘चोकपॉइंट’ को पार करने वाला दुनिया का सबसे पहला कमर्शियल जहाज कोई और नहीं, बल्कि भारत का LNG टैंकर ‘दिशा’ (Disha) बना है.

हैरत की बात ये है कि पिछले कई हफ्तों से जो जहाज इस रास्ते से छिपते-छिपाते, अपने ट्रांसपोंडर (लोकेशन सिग्नल) बंद करके गुजर रहे थे, वहीं भारतीय जहाज ‘दिशा’ ने अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) सीना तानकर ऑन रखा और लगातार अपनी लाइव लोकेशन सैटेलाइट को भेजते हुए सुरक्षित बाहर निकल गया.

कतर से गैस लेकर 18 जून को गुजरात पहुंचेगा ‘दिशा’

शिपिंग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने इस बड़ी कामयाबी की पुष्टि की है. सरकारी कंपनी ‘शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया’ (SCI) द्वारा संचालित माल्टा के झंडे वाला यह विशालकाय जहाज पिछले तीन महीनों से फारस की खाड़ी में युद्ध के कारण फंसा हुआ था. ‘दिशा’ अपने साथ 62370 मीट्रिक टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का भारी-भरकम खजाना लेकर आ रहा है. कतर से लोड हुआ यह गैस टैंकर होर्मुज को पार कर चुका है और 18 जून को गुजरात के दहेज बंदरगाह पर एंकर करेगा, जिससे देश में गैस की किल्लत दूर होगी. पिछले दो महीनों में इस तनावपूर्ण रास्ते को पार करने वाला यह पहला भारतीय व्यापारिक जहाज है.

इस रास्ते को पार करना ‘दिशा’ के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था. भारत के कूटनीतिक प्रयासों से मार्च-अप्रैल में कुछ जहाज निकले जरूर थे, लेकिन 18 अप्रैल को इस जलमार्ग पर तब तबाही मच गई जब ईरानी सेना ने अचानक इस रास्ते को बंद कर दिया और वहां से गुजरने की कोशिश कर रहे कुछ भारतीय जहाजों पर सीधे गोलीबारी कर दी.

उस खौफनाक दिन सिर्फ एक भारतीय जहाज ‘देश गरिमा’ जान बचाकर भागने में कामयाब रहा था. इसके बाद अमेरिका ने भी ईरानी पोर्ट्स की नाकेबंदी कर दी, जिससे स्थिति बदतर हो गई. भारत के लिए तेल और गैस लेकर आ रहे विदेशी जहाज भी वहीं थम गए और तब से लेकर अब तक कोई भी भारतीय झंडे वाला जहाज इस चक्रव्यूह को पार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था.

भारत के लिए क्यों खास है होर्मुज का रास्ता?

28 फरवरी को मिडिल ईस्ट में जंग शुरू होने के बाद से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके पूरी दुनिया को घुटनों पर ला दिया था, क्योंकि युद्ध से पहले दुनिया का 20% तेल-गैस व्यापार इसी रास्ते से होता था. इसके बंद होने से दुनिया में ईंधन की कमी शुरू हो गई थी. भारत के लिए तो यह रास्ता उसकी लाइफलाइन है.

बता दें कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस संकरे और बेहद संवेदनशील समुद्री रास्ते पर काफी हद तक निर्भर है, इसे इस आंकड़े से आसानी से समझा जा सकता है. भारत अपनी कुल जरूरत का 90% एलपीजी (रसोई गैस)

 इसी होर्मुज रूट और पश्चिम एशिया से आयात करता है, यही वजह है कि संकट गहराने पर सरकार ने सबसे पहले 8 एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित निकालने को प्राथमिकता दी. इसके अलावा, देश की फैक्ट्रियों और पावर प्लांट्स को दौड़ाने वाली 60% एलएनजी (प्राकृतिक गैस) का आयात भी इसी रास्ते से होता है, जिसका नेतृत्व अब तीन महीने बाद कतर से आ रहे ‘दिशा’ जहाज ने किया है. वहीं, देश की गाड़ियों और उद्योगों के लिए ईंधन की लाइफलाइन माना जाने वाला 40% कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) भी इसी स्ट्रेट के जरिए भारत पहुंचता है. साफ है कि इस रास्ते में होने वाली जरा सी भी हलचल सीधे भारतीय रसोइयों से लेकर सड़कों और फैक्ट्रियों तक का बजट बिगाड़ देती है.

खाड़ी में अभी भी कैद हैं 13 भारतीय जहाज

‘दिशा’ के सुरक्षित बाहर निकलने के बाद भी फारस की खाड़ी में अभी भी 13 भारतीय कमर्शियल जहाज और हजारों नाविक फंसे हुए हैं. मार्च की शुरुआत से अब तक केवल 10 भारतीय जहाज ही इस रास्ते को पार कर पाए हैं.
शिपिंग इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि भले ही अमेरिका-ईरान डील की घोषणा हो गई है और इस हफ्ते समझौते पर दस्तखत होने वाले हैं, लेकिन वैश्विक शिपिंग कंपनियां अभी भी फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं. समंदर में ट्रैफिक को पूरी तरह सामान्य होने में अभी कई हफ्ते लग सकते हैं, क्योंकि हर कोई देखना चाहता है कि पिछले 3 महीनों के कड़वे अनुभवों के बाद यह शांति समझौता टिकता है या नहीं. भारत सरकार ने साफ किया है कि जैसे ही यह रूट पूरी तरह सुरक्षित घोषित होगा, खाड़ी में फंसे बाकी जहाजों को भी तुरंत रेस्क्यू कर भारत लाया जाएगा.

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Author: admin

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