जिसका डर था, वही हुआ है. ग्लोबल मार्केट से मिले संकेतों, एशियाई बाजार, कच्चे तेल की कीमत में सुनामी और होर्मुज में फिर से भड़की जंग ने भारतीय शेयर बाजार में गिरावट ला दी है. सेंसेक्स 400 अंक की गिरावट के साथ खुला. वहीं निफ्टी 50 इंडेक्स 23,100 अंक से नीचे पहुंच गया. अमेरिका से चली आंधी ने भारतीय बाजार में बिकवाली को हावी कर दिया है. शुरुआती 5 सेकेंड में ही बाजार को सवा लाख करोड़ का झटका लगा गया.
BSE ने गिरावट के साथ आज 73,615.99 अंक पर ओपनिंग की. वहीं 9.21 बजे यह 289.38 अंक गिरने के बाद 73,693.80 अंक पर ट्रेड कर रहा . 10.06 बजे सेंसेक्स 340 अंक गिरकर 73,642.31 अंक पर ट्रेड कर रहा है. वहीं निफ्टी 0.32% टूटकर 23,139.65 अंक पर आ गया. 10 जून को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप 4,54,98,275.586 करोड़ रुपये था, जो 11 जून 2026 को मार्केट खुलते ही 4,53,07,157.19 करोड़ पर पहुंच गया. यानी चंद सेंसेक्स में 1,91,118.396 करोड़ स्वाहा हो गए.
आज 30 में से 26 शेयर गिरावट के साथ खुले
शेयर बाजार की गिरावट के साथ आज BSE पर लिस्टेड 30 में से 26 शेयर गिरावट के साथ खुले हैं. सबसे बुरा हाल IT शेयरों का कहा, जिसमें सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है. HCL टेक के स्टॉक 2.96 फीसदी गिरावट के साथ खुले हैं. Infosys, इटरनल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, टाइटन, TCS आदि के शेयरों में गिरावट आई है. जबकि पावरग्रिड, ICICI बैंक, सन फार्मा के स्टॉक चढे हैं.
शेयर के साथ-साथ रुपया भी गिरा
ग्लोबल मार्केट में गिरावट और तेल की तबाही ने 11 जून को फिर से रुपये में कमजोरी ला दी. बाजार खुलने के साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपया 25 पैसे की कमजोरी के साथ 95.52 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. ये लगातार दूसरा दिन है, जब रुपये में गिरावट आई है. इस गिरावट ने निवेशकों और आयातकों की चिंता बढ़ा दी है.
होर्मुज का तनाव और तेल की तबाही बने विलेन
खाड़ी युद्ध एक बार फिर से भड़क गया है. ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के फिर से शुरू होने के बाद ग्लोबल मार्केट में खलबली मची हुई है. अमेरिका बाजार, एशियाई मार्केट में दबाव दिखा है. कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी लौटी है. कच्चा तेल आज 2 फीसदी तक चढ़ गया है. युद्ध की आशंका ने बाजार को डराया है. वहीं डॉलर की मजबूती ने भारतीय करेंसी पर दबाव बढ़ा दिया है. कच्चे तेल की कीमतों ने डॉलर की मांग और मजबूती बढा दी है. चूंकि भारत तेल का बड़ा आयातक है, ऐसे में डॉलर की मजबूती का सीधा असर आयात लागत पर पड़ता है और रुपये पर दबाव बढ़ता है.








