हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के कर्मचारियों ने समय पर वेतन न मिलने पर कड़ा रुख अपनाया है. HRTC कर्मियों ने सरकार को सीधी चेतावनी दी है कि पहली तारीख को यदि उन्हें वेतन न मिला तो 2 जून से प्रदेश भर में HRTC के पहिए जाम कर दिए जाएंगे और कोई चालक परिचालक बसें नहीं चलाएगा. बीते 12 मई को भी HRTC कर्मियों के वेतन न मिलने पर चक्का जाम की चेतावनी दी थी. जिसको देखते हुए HRTC प्रबंधन ने आनन-फानन में कर्मियों को वेतन जारी कर दिया था.
HRTC कर्मियों कि अब तक 125 करोड़ की देनदारियां लंबित
HRTC चालक परिचालक यूनियन के अध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने बताया कि कर्मियों कि ओवर टाइम और अन्य लगभग 125 करोड़ की देनदारियां लंबित हैं. समय पर वेतन न मिलने से बैंक लोन की किस्तें, बच्चों की स्कूल फीस और घर का खर्च चलाने में भी भारी दिक्कत आ रही हैं.
यूनियन ने फिर दो टूक कहा कि हर माह देरी से वेतन नहीं चलेगा. उन्हें पहली तारीख को वेतन नहीं मिलता है, तो दो तारीख से चक्का जाम कर दिया जाएगा. जिससे होने वाली यात्रियों की परेशानी की जिम्मेदारी सरकार और प्रबंधन की होगी.
राज्य में मुफ्त यात्रा के चलते HRTC 2050 करोड़ से अधिक घाटे में
हिमाचल पथ परिवहन निगम के बेड़े में 3200 से ज्यादा बसें हैं. सरकार HRTC को 700 करोड़ से अधिक की ग्रांट हर साल देती है. जिससे HRTC के वेतन भत्तों सहित अन्य पर खर्च किया जाता है. हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC), जिसने 1974 से अपना सफर शुरू किया था, उसने अपना 50 साल का सफर पूरा लिया है.
HRTC राज्य में 31 डिपो के माध्यम से अपनी सेवाएं प्रदान करता है. HRTC में रोजाना पांच लाख से ज्यादा यात्री यात्रा करते हैं. अब तक दो लाख के करीब यात्री रियायती HIM बस पास बनवा चुके हैं. राज्य सरकार छात्रों, कर्मचारियों और अन्य श्रेणियों के लिए रियायती या मुफ्त यात्रा की सुविधा भी प्रदान करती है, जिस पर सालाना ₹110 करोड़ से अधिक खर्च होते हैं, जिसके चलते HRTC 2050 करोड़ से अधिक घाटे से जूझ रही है.








