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होर्मुज संकट के बीच आई खुशखबरी, बिना रोक टोक भर-भरकर आएगा रूसी तेल, भारत की जिद पर अमेरिका भी पीछे हटा!

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ईरान युद्ध पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से यूटर्न ले लिया है. अमेरिका ने ईरान पर हमले की कार्रवाई को रोक दिया है. अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद पर भी राहत देने की बात कही है. होर्मुज का रास्ता बंद होने के बाद अमेरिका ने प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद पर छूट को 30 दिनों के लिए बढ़ा दिया है. मार्च 2026 में अमेरिकी छूट की सीमा 16 मई को खत्म हो गई है. युद्ध की वजह से कच्चे तेल के दाम में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बाद सप्लाई चेन को जारी रखने के लिए रूसी तेल पर लगाए गए प्रतिबंध में छूट दी है.

रूसी तेल पर अमेरिका की छूट
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस के तेल निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी . ईरान युद्ध के बीच इस प्रतिबंध पर छूट दी गई, ताकि ग्लोबल ऑयल सप्लाई संकट को दूर किया जा सके. भारत के लिए ये खबर बड़ी राहत हैं, क्योंकि भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक रूस है. भारत रोजाना 1.9 मिलियन बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदता है . अमेरिकी छूट के ऐलान से पहले ही भारत ने ऐलान कर दिया था कि वो रूसी तेल के आयात को नहीं रोकेगा. ऐसे में अमेरिका की ओर से दी गई यह अतिरिक्त राहत भारत के लिए कुछ हद तक फायदेमंद मानी जा रही है.

भारत के लिए क्यों जरूरी है रूसी तेल
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ शब्दों में कहा कि रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका के प्रतिबंध और उसके छूट का असर नहीं पड़ेगा. भारत अपनी ऊर्जा जरूरत के हिसाब से तेल खरीदता रहेगा. अब समझते हैं कि आखिर रूसी तेल भारत के लिए इतना जरूरी क्यों है? जिस रूसी तेल की वजह से अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी का टैरिफ ठोक दिया था, भारत के लिए वो तेल इतना जरूरी क्यों है?

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रूसी तेल का भारत के लिए फायदा
1. साल 2022 में यूक्रेन के साथ रूस के युद्ध शुरू होने के बाद से भारत के तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 40 फीसदी तक पहुंच गई है. केपलर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक मई 2026 में भारत ने रोजाना 1.9 मिलियन बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदा है.

2. रूस से तेल आयात आसान है, लागत और शिपिंग लागत कम है. भारत को पहले रूसी तेल पर 5 से 10 फीसदी प्रति बैरल का डिस्काउंट मिल रहा था, हालांकि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से रूसी तेल की बढ़ी मांग की वजह से ये छूट फिलहाल खत्म हो गई. रूस भारत का पुरानी और विश्वसनीय साझेदार है.

3. भारत की रिफाइनरियां रूसी तेल की रिफाइनिंग के अनुरुप डिजाइन की गई है. रूस का भारी और उच्च सल्फर वाला तेल आसानी और कम लागत में प्रोसेस हो जाता है, जो भारत के लिए काफियती है.

4. सबसे बड़ी बात रूसी तेल होर्मुज के रास्ते से नहीं है. जिसकी वजह से सप्लाई चेन टूटने का खतरा खत्म हो जाता है. रूस से कच्चा तेल बाल्टिक सागर (Baltic Sea) और काला सागर (Black Sea) के रूसी बंदरगाहों से लोड होकर, स्वेज नहर और लाल सागर के रास्ते हिंद महासागर से होते हुए भारत पहुंचता है. इस रास्ते से रूसी तेल की खेप 25 से 30 दिनों में भारत पहुंच जाती है.

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