मिडिल ईस्ट संकट के बीच प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में ₹2.35 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है. वैश्विक तेल बाजार में मिडिल ईस्ट तनाव के बीच हुई इस बढ़ोतरी को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. जहां विपक्ष इसे आम उपभोक्ताओं पर बढ़ते बोझ का मुद्दा बता रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे वैश्विक हालात और भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति के संदर्भ में देख रहा है.
कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ‘महंगाई मैन’ ने एक और झटका दिया है. कांग्रेस ने इंडस्ट्रियल डीजल के दामों में बढ़ोतरी पर सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि इसका मतलब साफ है कि आप पर महंगाई की जबरदस्त मार पड़ने वाली है.
पवन खेड़ा ने पेट्रोल की बढ़ी कीमतों पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘पिछले 12 वर्षों में भारतीय सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर टैक्स से 26 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं. ऐसे संकट जैसे हालात में सरकार उपभोक्ताओं को उसका लाभ क्यों नहीं दे सकती? उपभोक्ताओं को क्यों भुगतना चाहिए?’
खेड़ा का कहना है कि सरकार ने ईंधन से बड़े पैमाने पर राजस्व जुटाया है, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी के समय राहत देने की जिम्मेदारी भी सरकार की ही बनती है. उनके मुताबिक, ईंधन की कीमतों का सीधा असर महंगाई और आम लोगों के दैनिक खर्च पर पड़ता है.
सरकार ने क्या दिया तर्क?
इस बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने सरकार का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया, ‘जिस बढ़ोतरी की आप बात कर रहे हैं, सामान्य पेट्रोल की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. बढ़ोतरी केवल प्रीमियम श्रेणी में हुई है और वह भी रोजाना बिकने वाले कुल पेट्रोल का केवल 2-4 प्रतिशत हिस्सा है.’
सरकार का तर्क है कि प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में संशोधन सीमित उपभोक्ता वर्ग को प्रभावित करता है और इसका आम वाहन चालकों पर सीधा असर नहीं पड़ता.
प्रीमियम डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर बीजेपी का रिएक्शन
वहीं भाजपा प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘पेट्रोल के उपभोक्ता बहुत ही सीमित हैं और उसका एक अलग प्रोसेस होता है. भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. यह भारत की आर्थिक बुनियाद की मजबूती को दिखाता है. आज दुनिया में पेट्रोल के दाम में लगातार उछाल आ रहा है, लेकिन भारत में कीमतें स्थिर हैं. यही भारत की दूरदर्शिता और आर्थिक नीति की ताकत को दर्शाता है. यूरोप, अमेरिका और हमारे पड़ोसी देशों में 30% से 50% तक का उछाल देखा गया है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘भारत की व्यवस्था मजबूत फंडामेंटल पर खड़ी है. मौजूदा वित्तीय वर्ष में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर लगभग 7% रहने का अनुमान है. फिस्कल डेफिसिट अपने प्रोजेक्टेड बजट डेटा के अनुसार नियंत्रित है. रिटेल महंगाई लगातार 4% से कम है और बेरोजगारी दर भी नियंत्रण में है.’
यूपी सरकार के मंत्री ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री नितिन अग्रवाल ने भी इस मुद्दे को वैश्विक हालात से जोड़ते हुए कहा, ‘युद्ध के समय में कीमतें बढ़ती ही हैं. यह संकट का समय है, सप्लाई नहीं हो पा रही है. जब स्थितियां नियंत्रण में आएंगी तो कीमतें भी कम होंगी. विपक्ष आरोप लगाती रहती है.’
दरअसल, प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक तेल बाजार भू-राजनीतिक तनाव के कारण अस्थिर बना हुआ है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर घरेलू बाजार पर पड़ना स्वाभाविक माना जाता है.
हालांकि फिलहाल सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर तत्काल प्रभाव सीमित है. लेकिन विपक्ष का तर्क है कि प्रीमियम ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी भविष्य में आम ईंधन की कीमतों पर दबाव का संकेत हो सकती है.









