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13 दिनों में पलटा मौसम का मिजाज: सैटेलाइट तस्वीरों ने खोला मॉनसून के अचानक ‘गायब’ होने का राज!

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जुलाई की शुरुआत में ही जोरदार बारिश के साथ एंट्री करने वाला मॉनसून अब कहीं गायब हो गया है! जून की भयंकर उमस से राहत दिलाने वाली बारिश का इंतजार लोग फिर से कर रहे हैं. उमस और चिपचिपाहट वाली गर्मी का दौर एक बार फिर से शुरू हो गया है. आखिर चंद दिनों में ही मौसम का मिजाज इस कदर क्यों पलट गया? इसका हैरान कर देने वाला जवाब अंतरिक्ष से आई सैटेलाइट तस्वीरों ने दिया है.

INSAT-3DS सैटेलाइट ने मात्र 13 दिनों के फासले पर ली गई दो तस्वीरों ने इस राज से पर्दा उठा दिया है कि आखिर दिल्ली-एनसीआर, यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और मुंबई समेत देश के एक बड़े हिस्से से बादल अचानक कहां गायब हो गए और क्यों हम Peak Monsoon सीजन में भी दोबारा पसीने से तर-बतर होने को मजबूर हैं.

तस्वीरों में दिखा मॉनसून का फ्लिप

INSAT-3DS सैटेलाइट से 30 जून को ली गई पहली तस्वीर में दिख रहा था कि पूरे मध्य, पश्चिमी और पूर्वी भारत पर घने मॉनसूनी बादलों की एक मोटी चादर बिछी हुई थी. उस समय देश में कई वेदर सिस्टम एक्टिव थे, इसी कारण से जुलाई के शुरुआत में ही झमाझम बारिश हुई और जून के महीने में हुए भारी बैकलाग की काफी हद तक भरपाई हो गई थी.

लेकिन 13 जुलाई की नई सैटेलाइट तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. अब मध्य और दक्षिण भारत से घने बादल पूरी तरह साफ हो गए हैं. ये बादल अब खिसककर पूर्वी भारत, हिमालय की तलहटी और पूर्वोत्तर राज्यों पर जमा हो गए हैं. पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी भारत का आसमान पूरी तरह साफ दिख रहा है, जो इस बात का सबूत है कि देश में आधिकारिक तौर पर मॉनसून ब्रेक हो गया है.

क्यों बदला मॉनसून का मिजाज?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बादलों का यह बदला हुआ पैटर्न मॉनसून ट्रफ या मॉनसून की धुरी के खिसकने के कारण से हुआ है. यह धुरी अब उत्तर की तरफ बढ़कर हिमालय की पहाड़ियों के पास पहुंच गई है. जब ऐसा होता है, तो देश के बड़े हिस्से में बारिश रुक जाती है, वहीं पहाड़ी और पूर्वोत्तर इलाकों में मूसलाधार बारिश शुरू हो जाती है.

भले ही पिछले दो हफ्तों में बारिश का अंतर थोड़ा कम हुआ हो, लेकिन 1 जून से 13 जुलाई के बीच देश में अभी भी सामान्य से 18% कम बारिश दर्ज की गई है. यानी मॉनसून को अभी काफी रिकवरी करनी बाकी है.

पूर्वोत्तर में बाढ़ का खतरा, बाकी देश रहेगा सूखा

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले सप्ताह में सिर्फ पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार के पहाड़ी इलाकों में ही भारी बारिश की उम्मीद है.

7 दिनों का अनुमान
पूर्वोत्तर के राज्यों में अगले सात दिनों में 200 से 300 mm तक बारिश की संभावना है.

मेघालय में अलर्ट
मेघालय के कुछ हिस्सों में 500 mm से भी ज्यादा बारिश का अनुमान है, जिससे वहां बाढ़ और भूस्खलन का बड़ा खतरा मंडरा रहा है.

ऐसा क्यों हो रहा है?

जब मॉनसून की धुरी पहाड़ों की ओर जाती है, तो बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं पूर्वोत्तर भारत में भारी नमी पहुंचाती हैं. ये हवाएं जब गारो, खासी और जयंतिया पहाड़ियों से टकराकर ऊपर उठती हैं, तो वहां लगातार और भीषण बारिश कराती हैं. वहीं मध्य और दक्षिण भारत में हवाएं नीचे की ओर बैठती हैं, जिससे धूप निकलती है और सूखा मौसम बना रहता है.

अब सबकी नजरें बंगाल की खाड़ी पर टिकी हैं. अगर वहां कोई नया कम दबाव का क्षेत्र बनता है, तभी मॉनसून की धुरी वापस नीचे आएगी और सूखे की मार झेल रहे मध्य व पश्चिमी भारत को राहत मिलेगी. नहीं तो, पूर्वोत्तर में बाढ़ आती रहेगी और देश का बाकी हिस्सा पानी के लिए तरसता रहेगा.

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Author: admin

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