ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन का संकट गहरा गया है, जिसका असर भारत पर भी देखने को मिल रहा है. इस स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचाने और मितव्ययिता अपनाने की अपील की थी. इसी सिलसिले में अब दिल्ली सरकार के आह्वान पर प्रशासनिक अधिकारी भी ईंधन संरक्षण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध नजर आ रहे हैं. सोमवार को दिल्ली के वेस्ट (पश्चिमी) जिले के प्रशासनिक अमले ने आम जनता के बीच एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया.
‘मंडे मेट्रो’ अभियान
सोमवार को वेस्ट जिले के जिलाधिकारी (डीएम), अतिरिक्त जिलाधिकारी (एडीएम) और उपमंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) सहित तमाम वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी सरकारी गाड़ियां छोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल किया. सभी अधिकारियों ने पहले दिल्ली मेट्रो से सफर किया और फिर राजौरी गार्डन पिंक लाइन मेट्रो स्टेशन पर उतरने के बाद, वहां से ई-रिक्शा में बैठकर डीएम कार्यालय पहुंचे. अधिकारियों को आम यात्रियों की तरह सफर करते देख मेट्रो और सड़कों पर लोग हैरान भी हुए और उनके इस कदम की सराहना भी की.
निजी वाहनों का कम करें उपयोग
इस अनोखी पहल के दौरान वेस्ट जिले के डीएम हरि कलीकट ने कहा कि वैश्विक हालातों की वजह से देश में इस समय ईंधन को लेकर जो परिस्थितियां बनी हैं, उनमें हर नागरिक को जिम्मेदारी उठानी होगी. उन्होंने कहा कि देश में इस समय ‘मेरा भारत, मेरा योगदान’ अभियान चल रहा है. इस अभियान के तहत हर देशवासी का यह कर्तव्य है कि वह निजी वाहनों का उपयोग कम करे और पब्लिक ट्रांसपोर्ट (सार्वजनिक परिवहन) का अधिक से अधिक इस्तेमाल करके ईंधन बचाने में अपना सहयोग दे.
डीएम ने आगे बताया कि उन्होंने और उनकी टीम ने मेट्रो के साथ-साथ ई-रिक्शा का सफर कर दफ्तर पहुंचकर समाज को एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है. उनके इस कदम से प्रेरित होकर जिला कार्यालय का दूसरा स्टाफ भी मेट्रो, डीटीसी बसों या अन्य सार्वजनिक वाहनों के जरिए दफ्तर पहुंचा है, जो पर्यावरण और देश के संसाधनों को बचाने की दिशा में एक बेहद सराहनीय प्रयास है.








