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नकली नौकरी का मायाजाल, और असली वीजा… कैसे H1B Visa फ्रॉड के चलते US में फंसे 2 भारतीय

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भारतीय मूल के दो लोगों ने अमेरिका में H-1B वीजा धोखाधड़ी मामले में अपनी गलती को स्वीकार कर लिया है. यह मामला अमेरिकी कोर्ट में पिछले कई सालों से चल रहा था, जिसमें संपथ राजिडी और श्रीधर मादा (दोनों 51 वर्षीय) पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी नौकरी के ऑफर का इस्तेमाल कर विदेशी नागरिकों के लिए H-1B वीजा हासिल की थी.

अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, दोनों ने गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) को वीजा धोखाधड़ी का अपराध को स्वीकार किया. उन्हें अधिकतम 5 साल की सजा और 2.5 लाख डॉलर (लगभग 2.33 करोड़ रुपये) तक का जुर्माना हो सकता है.

किन कंपनियों के जरिए किया गया अपराध

अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, राजिडी ने एस-टीम सॉफ्टवेयर इन्क (S-Team Software Inc) और अपट्रेंड टेक्नोलॉजिस एलएलसी (Uptrend Technologies LLC) नाम की कंपनियों के जरिए विदेशी कर्मचारियों को H-1B वीजा के लिए स्पॉन्सर किया. वहीं, माडा यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया एग्रीकल्चर एंड नेचुरल रिसोर्सेज (University of California Agriculture and Natural Resources/UCANR) में चीफ इन्फॉर्मेशन ऑफिसर थे. इस पद पर होने के बावजूद उनके पास स्वतंत्र रूप से H-1B कर्मचारियों को नियुक्त करने का अधिकार नहीं था.

जांच में क्या हुआ खुलासा?

जांच में सामने आया कि 2020 से 2023 के बीच दोनों ने मिलकर कई फर्जी H-1B आवेदन दाखिल किए. इन आवेदनों में दावा किया गया कि विदेशी कर्मचारी यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में काम करेंगे, जबकि असल में ऐसी कोई नौकरियां मौजूद ही नहीं थीं. प्रॉसिक्यूटर्स के मुताबिक, इन झूठे दावों के कारण उन्हें अन्य कंपनियों के मुकाबले अनुचित फायदा मिला और असली आवेदकों के लिए उपलब्ध H-1B वीजा की संख्या भी कम हो गई.

जांच में यह भी पाया गया कि वीजा मिलने के बाद इन कर्मचारियों को अन्य क्लाइंट्स के पास काम के लिए भेजा गया, न कि यूनिवर्सिटी प्रोजेक्ट्स पर. अब इस मामले में अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज ट्रॉय एल. ननली की ओर से सजा 30 जुलाई को सुनाई जाएगी.

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Author: admin

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