ग्लोबल लेवल पर तेल के दाम में उछाल, वेस्ट एशिया तें चल रहे संघर्ष और अनिश्चितताओं के बीच भारतीय इकोनॉमी मजबूत बनी हुई है. एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की तरफ से अनुमान जताया गया कि फाइनेंशियल ईयर 2026-27 (FY27) में देश की GDP ग्रोथ 6.8 से 7.1 प्रतिशत के बीच रह सकती है. रिपोर्ट में कहा गया कि FY26 में ग्रोथ 7.6 प्रतिशत रही है. ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद भारत मजबूती से इन हालात का सामना कर रहा है.
तेल संकट और वेस्ट एशिया संघर्ष का असर
इससे पहले तेल संकट के दौरान अमेरिकी इकोनॉमी में मंदी देखी जाती थी, लेकिन इस बार हालात अलग है. अमेरिका अब एनर्जी में आत्मनिर्भर है और तेल निर्यातक देश बन चुका है. SBI रिसर्च के अनुसार भारत इस बार रूस-यूक्रेन संकट जैसी मजबूत स्थिति में है, जब ग्रोथ 9 प्रतिशत से ऊपर थी. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि वेस्ट एशिया में तनाव से एग्रीकल्चर, MSME, उपभोग और ग्लोबल सप्लाई चेन पर दूसरी और तीसरी लेवल की मार पड़ सकती है.
महंगाई और फिक्सल डेफिसिट (SBI रिसर्च)
- महंगाई दर (Inflation) 4.5 प्रतिशत के करीब रहने का अनुमान है.
- फिक्सल डेफिसिट (Fiscal Deficit) 4.5-4.6 प्रतिशत के करीब रहेगा.
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RBI पॉलिसी पर क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट में कहा गया कि आरबीआई (RBI) के लिए ‘ग्रोथ-इन्फ्लेशन पैराडॉक्स’ के कारण अभी ब्याज दर में बदलाव की गुंजाइश कम है. आरबीआई (RBI) शायद मौजूदा मौद्रिक पॉलिसी को बनाए रखे. ‘लोअर फॉर लॉन्गर’ वाला सिस्टम तब तक जारी रह सकती है, जब तक युद्ध और मौसम के पूरा असर साफ नहीं हो जाएं.
रिपोर्ट अहम क्यों?
ग्लोबल लेवल पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन, तेल के ऊंचे दाम और सप्लाई चेन टूटने के बावजूद SBI रिसर्च की तरफ से भारत की जीडीपी ग्रोथ पर मजबूत अनुमान जताया गया है. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि बैलेंस ऑफ पेमेंट्स और रुपये को मजबूत बनाने के लिए व्यापक पैकेज की जरूरत है. एसबीआई रिसर्च का अनुमान कई दूसरी एजेंसियों के पूर्वानुमान से मेल खाता है. कुछ रिपोर्ट में कुछ कम अनुमान भी जताया गया है. कुल मिलाकर मजबूत घरेलू डिमांड, सर्विस सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर देश को ग्लोबल तूफानों से बचाने में मदद कर रहे हैं.








