महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) यूनिट में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोपों से घिरी पूर्व कर्मचारी निदा खान को बड़ी राहत मिली है. नासिक की एक स्थानीय अदालत ने निदा खान की पांच महीने की गर्भावस्था (प्रेग्नेंसी) को आधार मानते हुए उन्हें सशर्त जमानत दे दी है. मामले की सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशन जज के.जी. जोशी ने एक बेहद भावुक और महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी महिला के लिए जेल में बच्चे को जन्म देने का सदमा और उससे जुड़ा सामाजिक कलंक बर्दाश्त के बाहर है.
अदालत ने इ स्थिति की तुलना द्वापर युग में भगवान कृष्ण के जन्म के समय के हालातों से करते हुए कहा कि एक नवजात बच्चे के सुरक्षित आगमन और भलाई के लिए आरोपी महिला को न्यायिक विवेक के आधार पर राहत देना पूरी तरह उचित है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है.
25 दिनों तक फरार रही थी निदा
इस हाई प्रोफाइल मामले में नाम आने और अप्रैल 2026 में TCS से नौकरी से निकाले जाने के बाद निदा खान करीब 25 दिनों तक पुलिस को छकाती रही थीं. आखिरकार, 7 मई को पुलिस ने उन्हें सेंट्रल महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक किराए के फ्लैट से गिरफ्तार किया था. जमानत की अर्जी देते हुए निदा खान के वकील राहुल कासलीवाल ने दावा किया कि उनकी मुवक्किल पूरी तरह बेगुनाह हैं, वे उच्च शिक्षित हैं और उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है. कोर्ट ने निदा को 75000 रुपये के पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही राशि की श्योरिटी पर रिहा करने का आदेश दिया.
बुर्का, हिजाब और नमाज… दलित पीड़िता के ब्रेनवॉश का सनसनीखेज आरोप
देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले में निदा खान पर एक दलित महिला सहकर्मी का मानसिक और धार्मिक उत्पीड़न करने के बेहद संगीन आरोप हैं. जांच के मुताबिक, आरोप है कि निदा खान ने पीड़िता को बुर्का और इस्लामिक धार्मिक किताबें देकर उसका ब्रेनवॉश करने का प्रयास किया. पीड़िता के मोबाइल में इस्लाम से जुड़े ऐप्स इंस्टॉल करने, उसके घर जाकर जबरन नमाज पढ़ना सिखाने और हिजाब पहनने के लिए दबाव बनाने के आरोप भी निदा पर हैं.
इस मामले में पीड़ितों की तरफ से पेश हुए सरकारी वकील विजय गायकवाड़ और अन्य वकीलों ने निदा खान और सह आरोपी दानिश शेख की जमानत का पुरजोर विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि जांच में यौन उत्पीड़न और जबरन धार्मिक दबाव बनाने के पुख्ता सबूत मिले हैं.
BNS और SC-ST एक्ट के तहत केस
नासिक पुलिस फिलहाल इस पूरी यूनिट में महिला कर्मचारियों के शोषण, छेड़छाड़ और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से जुड़े कुल 9 मामलों की गहन जांच कर रही है. निदा खान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 (धोखे से संबंध बनाना), धारा 65 (यौन उत्पीड़न), धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और पीड़िता के दलित होने के कारण SC-ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है.
इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी TCS ने भी सख्त रुख अपनाया है. कंपनी ने बयान जारी कर कहा कि वे किसी भी तरह के उत्पीड़न और जबरदस्ती के खिलाफ ‘जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी’ रखते हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए नासिक ऑफिस में इस कथित कृत्य में शामिल कर्मचारियों को तुरंत सस्पेंड और टर्मिनेट कर दिया गया था.








