सरकार ने कमर्शियल सिलेंडर के दाम में हुई बढ़ोतरी को लेकर बयान जारी किया है. सरकार का कहना है कि कमर्शियल LPG सिलेंडर का इस्तेमाल होटल, ढाबों और इंडस्ट्री में होता है, उनके दाम सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं होते. ये पूरी तरह बाजार के हिसाब से तय होते हैं और आमतौर पर हर महीने बदले जाते हैं.
LPG खपत में हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से भी कम
देश में कुल LPG खपत में इनकी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से भी कम है, इसलिए इनके दाम बढ़ने का सीधा असर आम घरेलू उपभोक्ता पर सीमित है. 1 अप्रैल को कमर्शियल सिलेंडर के दाम में हुई बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में आया तेज उछाल है. इसके पीछे प्रमुख कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वैश्विक LPG सप्लाई का 20-30 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित होना है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बना और कीमतें बढ़ गईं.
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को नुकसान
सरकार का पक्ष है कि आम आदमी की रसोई पर फिलहाल इस बढ़ोतरी का असर नहीं डाला गया है. मौजूदा स्थिति में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां हर घरेलू सिलेंडर पर करीब 380 रुपये का नुकसान उठा रही हैं. अनुमान है कि मई के अंत तक यह कुल नुकसान लगभग 40,484 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. पिछले साल भी कुल 60000 करोड़ रुपये के नुकसान में से आधा बोझ सरकार और आधा ऑयल कंपनियों ने उठाया था. ताकि, अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर सीधे जनता पर न पड़े.
सरकार ने भारत की पाकिस्तान और नेपाल श्रीलंका से तुलना करते हुए कहा , पाकिस्तान में यह करीब 1,046, श्रीलंका में 1,242 और नेपाल में 1,208 के आसपास है.
कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 195.50 रुपये बढ़े
मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध के चलते कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम बढ़ गए हैं. सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने 1 अप्रैल को 19 किलो के एलपीजी सिलेंडर के दाम में 195.50 रुपये का इजाफा किया है. दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1883 रुपये से बढ़कर 2078.50 रुपये हो गई है. 1 मार्च से अब तक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 310 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है. जानकारी के मुताबिक, कोलकाता में आज से 19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2208.00 रुपये, मुंबई में 2031.00 रुपये और चेन्नई में 2246.50 रुपये हो गई है.









