Search
Close this search box.

‘कर्ज मांगने जाते हैं तो बड़ी शर्म आती है’, मुनीर का जिक्र कर शहबाज का कबूलनामा, बताई पाकिस्तान की हकीकत

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुलेआम ये माना है कि उन्हें और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को फंड मांगने के लिए अन्य देशों में जाना पड़ा. इस्लामाबाद में शुक्रवार (30 जनवरी) को पाकिस्तानी व्यापारियों को संबोधित करते हुए शरीफ ने देश की अर्थव्यवस्था और अपनी सरकार द्वारा लिए गए फैसलों पर बात की.

पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति में सुधार का जिक्र करते हुए शरीफ ने कहा कि वर्तमान स्थिति में विदेशी मुद्रा भंडार लगभग दोगुना हो गया है, लेकिन इसमें हमारे मित्र देशों और अन्य देशों के कर्जे भी शामिल हैं. आप जानते ही हैं कि जो कर्ज लेने जाता है, उसका सिर झुका रहता है. शहबाज ने विस्तार से बताया कि किस तरह उन्हें और आसिम मुनीर को कर्ज मांगने के लिए शर्मनाक तरीके से समझौता करना पड़ा.

‘पैसे मांगने जाते हैं तो हमें शर्म आती है’

शहबाज शरीफ ने कहा कि जब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और मैं दुनिया भर में पैसे मांगने जाते हैं तो हमें शर्म आती है. कर्ज लेना हमारे आत्मसम्मान पर बहुत बड़ा बोझ है. शर्म से हमारा सिर झुक जाता है. वो हमसे जो भी काम करवाना चाहते हैं, हम उसे मना नहीं कर पाते. ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब पाकिस्तान सख्त नीतियां लागू करने के बाद आर्थिक विकास को समर्थन देने की योजना के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ चर्चा कर रहा है.

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने केंद्रीय बैंक और वित्त मंत्रालय को पूंजी तक पहुंच में सुधार करके औद्योगिक विकास को समर्थन देने का निर्देश दिया है. शरीफ ने शुक्रवार को कहा कि गवर्नर को कारोबारी नेताओं की बात सुननी होगी और साहसिक फैसले लेने होंगे.

आईएमएफ से मिला 1.2 अरब डॉलर का लोन

बता दें कि पाकिस्तान को हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से अपने ऋण कार्यक्रम और जलवायु संबंधी एक अलग फंड योजना के तहत 1.2 अरब डॉलर मिले हैं. इस फंड से पाकिस्तान को कर्ज चुकाने और अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में मदद मिली है.

पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने इस सप्ताह अप्रत्याशित रूप से अपनी प्रमुख ब्याज दर को 10.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा. बैंक ने मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंकाओं का हवाला देते हुए जून में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में जीडीपी में 3.75 प्रतिशत-4.75 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है.

admin
Author: admin

और पढ़ें