गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए नर्मदा जिले में राजपीपळा-रामगढ (नवागाम) रोड पर करजण नदी पर स्थित मेजर ब्रिज के निर्माण की खराब गुणवत्ता को लेकर ठेकेदार के विरुद्ध प्रभावी एवं कड़े कदम उठाए हैं. सीएम पटेल ने राज्य सरकार के सड़क एवं भवन विभाग को इस पुल के निर्माण में शामिल मेसर्स रॉयल इन्फ्रा इंजीनियरिंग प्रा. लि., सूरत के विरुद्ध आपराधिक शिकायत-एफआईआर दर्ज करने के दिशा-निर्देश दिए. सीएम के निर्देश के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की गई है.
दरअसल, राजपीपळा तथा रामगढ के आसपास के क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण यह पुल गुणवत्तापूर्ण नहीं होने के कारण जोखिमपूर्ण पाया गया. पुल के निरीक्षण तथा परीक्षण के बाद इस पुल के ठेकेदार के विरुद्ध आपराधिक शिकायत दर्ज की गई है. इसके अलावा, खराब कार्य के लिए संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध भी कड़े कदम उठाने के आदेश दिए गए हैं.
जांच के दौरान मिली थी खामियां
जानकारी के अनुसार, सड़क एवं भवन विभाग ने इस पुल का कार्य वर्ष 2018-2019 में ठेकेदार मेसर्स रॉयल इन्फ्रा इंजीनियरिंग प्रा. लि., सूरत को सौंपा था. कुल 10.71 करोड़ रुपए में इस पुल का निर्माण कराना था और पुल निर्माण का काम साल 2018 में शुरू हुआ और 2020 को पूरा हुआ था.
हालांकि, जब विभाग ने पुल की जांच की तो एक फाउंडेशन के धंसने की बात सामने आई थी. यह क्षति सामने आने पर क्वालिटी कंट्रोल प्रभाग ने पूरे पुल का परीक्षण एवं निरीक्षण करने को कहा था. इसमें जाँच के दौरान पुल के अन्य हिस्सों में भी क्षतियाँ ध्यान में आई थीं. पुल को यातायात के लिए उपयुक्त एवं सुरक्षित नहीं पाए जाने के कारण उस पर यातायात बंद करना भी अनिवार्य हो गया था.
सीएम ने मामले में लिया एक्शन
इसके बाद सीएम भूपेंद्र पटेल ने इस गंभीर क्षति को ध्यान में लेते हुए पुल का निर्माण करने वाले ठेकेदार मेसर्स रॉयल इन्फ्रा इंजीनियरिंग प्रा. लि. तथा उसके प्रतिनिधियों के विरुद्ध लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आपराधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए. इसके अलावा, उन्होंने पुल के निर्माण में किए गए हल्की गुणवत्ता के कार्य और संबंधित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी गुजरात राज्य सेवा (अनुशासन व अपील) नियम, 1971 अंतर्गत कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए हैं.
सीएम का सीधा और स्पष्ट संदेश
गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल ने इस कार्रवाई के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि राज्य सरकार सार्वजनिक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता व सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं करना चाहती है. मुख्यमंत्री अक्सर कहते हैं कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में गंभीर खामियों तथा जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही के विरुद्ध कानून एवं नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इस कड़ी कार्रवाई से मुख्यमंत्री ने उनकी यह बात साकार हुई है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपनाई गई ‘जो कहना, वह करना’ की कार्यशैली का एक और उदाहरण प्रस्तुत किया है.








