ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी के अवसर अमृतसर में शनिवार (6 जून) को सिखों के सबसे पवित्र तीर्थ स्थल स्वर्ण मंदिर परिसर में खालिस्तान-समर्थक नारे लगाए गए. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अकाल तख्त के सामने जरनैल सिंह भिंडरावाले के पोस्टर भी बांटे. इसके वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे कुछ प्रदर्शनकारी हाथों में जरनैल सिंह भिंडरावाले के पोस्ट लिए हुए हैं और कुछ ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे हैं.
ये लोग 6 जून को भिंडरावाले की पुण्यतिथि के रूप में हर साल मनाते हैं. भिंडरावाले दामदमी टकसाल का प्रमुख था, जो 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार में अपने समर्थकों के साथ मारा गया था. इस कार्यक्रम को देखते हुए पहले ही पंजाब पुलिस ने अमृतसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के सख्त इंतजाम कर दिए थे.
CAPF की पांच कंपनियां तैनात
विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रवीण कुमार सिन्हा ने 4 जून को जिले का दौरा भी किया था और बताया था कि शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करने के लिए लगभग चार हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. सिन्हा ने जानकारी दी कि शहर में पहले से मौजूद पुलिस बल को और मजबूत करने के लिए सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) की 5 कंपनियां तैनात की गई हैं.
पत्रकारों से बात करते हुए प्रवीण कुमार सिन्हा ने कहा, “6 जून को ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के मौके पर कई कार्यक्रम और आयोजन होते हैं, जिससे सुरक्षा का माहौल संवेदनशील और तनावपूर्ण हो जाता है. इसे देखते हुए हमने पूरे पंजाब में, खासकर अमृतसर और उसके आस-पास के इलाकों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गये हैं.”
स्वर्ण मंदिर के बाहर भी सुरक्षा के सख्त इंतजाम
न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब पुलिस ने स्वर्ण मंदिर के बाहर भी सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए हैं. एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (ADCP) विशालजीत सिंह ने कहा, “हमने 6 जून के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि को रोकने के लिए पूरे शहर में चेकपॉइंट बनाए गए हैं. पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है और स्वर्ण मंदिर की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं.”
ऑपरेशन ब्लू स्टार क्यों चलाया गया था?
बता दें कि 1984 में भिंडरावाले और उसके समर्थकों ने कुछ मांगो के साथ अकाल तख्त परिसर को अपना डेरा बना लिया था. इन मांगों में खालिस्तान की मांग भी शामिल थी. उसपर आरोप थे कि वो परिसर का उपयोग उग्रवादी गतिविधियों, हथियारों के भंडारण और हिंसक कार्रवाइयों के लिए कर रहा था. इसके बाद जून 1984 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया था, जिसका उद्देश्य स्वर्ण मंदिर को भिंडरेवाला और उसके समर्थकों से आजाद कराना था.








