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IDFC First Bank के शेयरों में भूचाल, 15% के लोअर सर्किट पर स्टॉक; 590 करोड़ के फ्रॉड से हड़कंप

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IDFC फर्स्ट बैंक लिमिटेड के शेयरों का आज बुरा हाल है. सोमवार, 23 फरवरी को बैंक के शेयर 15 परसेंट के लोअर सर्किट पर पहुंच गए. शेयरों में आई गिरावट की बड़ी वजह 590 करोड़ रुपये का फ्रॉड है.

क्या है मामला?

मुंबई बेस्ड इस प्राइवेट बैंक ने रविवार को एक्सचेंज को दी गई जानकारी दी कि हरियाणा सरकार ने एक विभाग ने बैंक के चंडीगढ़ ब्रांच में अपने एक अकाउंट को बंद करने और उसमें रखा पैसा दूसरे बैंक के अकाउंट में ट्रांसफर करने की बात कही थी. इस प्रॉसेस के दौरान जब बैंक ने हिसाब मिलाया, तो देखा कि विभाग के तरफ से बताए जाने के अनुसार अकाउंट में जितने पैसे होने चाहिए असल बैलेंस उससे काफी कम है. शुरुआती जांच में हरियाणा सरकार से जुड़े कई खातों में लगभग 590 करोड़ का अंतर सामने आया.

धोखाधड़ी के पीछे किसका हाथ?

अब सवाल आता है कि इतनी बड़ी मात्रा में रकम की हेरफेर किसने की? बैंक का कहना है कि यह अंदरूनी धोखाधड़ी है. बैंक के ही कुछ कर्मचारी बाहरी लोगों के साथ मिलकर अनैतिक तरीके से खाते से पैसे निकाले या ट्रांसफर किए. फिलहाल, मामले की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने तक बैंक ने तुरंत चार कर्मचारियों को सस्पेंड भी कर दिया है. इस घटना पर सरकार ने भी कड़ा रूख अपनाया है.

हरियाणा सरकार ने अपने सभी विभागों से IDFC फर्स्ट बैंक और AU Small Finance Bank से अपना सारा पैसा निकालकर दूसरे सरकारी बैंकों में जमा कराने का आदेश दे दिया है. इस बीच, आम ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि इस फ्रॉड का आम जनता के सेविंग्स अकाउंट या  फिक्स्ड डिपॉजिट पर कोई असर नहीं पड़ेगा. बैंक ने कहा है कि यह फ्रॉड केवल हरियाणा सरकार के खास खातों तक ही सीमित है.

मामले पर RBI का क्या है रूख?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने सोमवार को कहा कि IDFC फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले से जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और इसमें कोई प्रणालीगत समस्या नहीं है. उन्होंने केंद्रीय बजट के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल को दिए गए पारंपरिक संबोधन के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों से कहा, ”हम घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं, इसमें कोई प्रणालीगत समस्या नहीं है.”

इससे पहले,IDFC फर्स्ट बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वी. वैद्यनाथन ने सोमवार को कहा कि बैंक के कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की मिलीभगत के जरिये हरियाणा सरकार के खातों से जुड़ी 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया. यह मुद्दा एक इकाई और एक ग्राहक समूह तक सीमित है. यह किसी प्रणालीगत ‘रिपोर्टिंग’ त्रुटि का मामला नहीं है.

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