भारत-अमेरिका ट्रेड डील से चंद दिनों पहले 27 जनवरी को भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच व्यापार समझौता हुआ. इस डील को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा गया. इसके बाद अमेरिका के साथ हुई ट्रेल डील को ‘फादर ऑफ ऑल डील’ कहा जा रहा है. इसी बीच भारत के अपने पड़ोसी और दुनिया की दूसरी बड़ी इकोनॉमी यानी चीन के साथ भी व्यापार के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की रिपोर्ट्स आई हैं.
यूरोप और अमेरिका के साथ भारत की डील के बाद अब कहा जा रहा है कि इसी तरह की डील अगर चीन से हो जाए तो क्या होगा. दोनों ही डील से भारत का व्यापार देश के पक्ष में है, क्योंकि भारत अमेरिका और यूरोपीय यूनियन दोनों को आयात से ज्यादा निर्यात करता है. इस कारण इन पक्षों ने भारत के साथ ट्रेड डील करने को अहमियत दी. कहीं न कहीं उन्हें भारत संग डील के लिए मजबूर होना पड़ा.
भारत-चीन व्यापार संतुलन
चीन का मामला अमेरिका और यूरोप से अलग है, क्योंकि चीन से आयात बहुत ज्यादा और निर्यात बहुत कम होता है. दरअसल भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने मंगलवार को चीनी नववर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में घोषणा की कि दोनों देशों के बीच व्यापार 155.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है. राजदूत ने कहा कि व्यापार में यह वृद्धि भारत-चीन संबंधों में सुधार के स्पष्ट संकेत हैं.
चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने कहा कि भारत से चीन को निर्यात में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो गई है, जिसमें लगभग 20,000 भारतीय तीर्थ यात्री शामिल हुए. चीन ने भारतीय नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा फिर से जारी करना शुरू कर दिया है. इतना ही नहीं दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी बहाल हो गई हैं, जिससे लोगों के बीच आवाजाही बढ़ेगी.
क्या बोले चीनी राजदूत
जू फेइहोंग ने कहा कि अगस्त 2025 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तियानजिन में सफल मुलाकात ने भारत-चीन संबंधों को रीसेट और फ्रेश स्टार्ट किया. उन्होंने जोर दिया कि दोनों देश एक-दूसरे के सहयोगी हैं. इसके अलावा चीनी राजदूत ने भारत की इस साल ब्रिक्स अध्यक्षता का भी समर्थन किया और कहा कि चीन ब्रिक्स के जरिए बहुपक्षीय समन्वय मजबूत करने और ग्लोबल साउथ के विकास को बढ़ावा देने के लिए तैयार है.
भारत-चीन व्यापार में रिकॉर्ड वृद्धि के बावजूद भारत की ओर से कुछ चिंताएं बनी हुई हैं, क्योंकि द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन है. चीन का निर्यात भारत की तुलना में काफी अधिक है. भारतीय पक्ष ने चीन के बाजारों में पर्याप्त पहुंच की कमी, खासकर उर्वरक, रेयर अर्थ और टनल बोरिंग मशीनरी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्यात प्रतिबंधों पर चिंता जताई है.
भारत का व्यापार घाटा
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 2025 में भारत का व्यापार घाटा 116 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया, जो रिकॉर्ड स्तर का है. चीनी राजदूत ने कहा कि चीन न केवल विश्व का कारखाना बल्कि विश्व का बाजार भी बनना चाहता है. चीन का टैरिफ स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों से कम (7.3 फीसदी) है, विदेशी निवेश की नेगेटिव लिस्ट छोटी हो रही है और वीजा-फ्री नीति का विस्तार हो रहा है.








